नित्य संदेश ब्यूरो, इंदौर
इंदौर नगर निगम परिषद की बैठक उस समय हंगामे की भेंट चढ़ गई जब कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान ने सत्तापक्ष को ललकारते हुए अत्यंत तल्ख और विवादित टिप्पणी कर दी। सदन की गरिमा को दरकिनार करते हुए चर्चा के दौरान उन्होंने सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा कि "अगर बाप में दम हो तो वंदेमातरम् कहलाकर दिखाओ।" इस एक बयान ने शांत चल रही परिषद की कार्यवाही में बारूद की तरह काम किया और देखते ही देखते पूरा सदन नारों और शोर-शराबे से गूंज उठा।
स्वच्छता के शिखर पर रहने वाले शहर की इस सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था में ऐसी भाषा के इस्तेमाल ने न केवल जनप्रतिनिधियों बल्कि आम नागरिकों को भी हैरान कर दिया।
इस बयान के आते ही बीजेपी पार्षदों ने मोर्चा संभाल लिया और सदन में जमकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। सत्तापक्ष ने इसे राष्ट्रगीत का अपमान और देश की संवैधानिक परंपराओं पर सीधा हमला करार देते हुए पार्षद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सदन के भीतर 'वंदेमातरम्' के नारों की गूंज के बीच महापौर और सभापति ने इस शब्दावली पर सख्त आपत्ति जताई।
भाजपा नेताओं का आरोप है कि इस तरह की भाषा का प्रयोग कर न केवल उकसाने की कोशिश की गई है, बल्कि यह एक वर्ग विशेष के तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा है। हंगामे की स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि सभापति को सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।
इस घटना के बाद अब इंदौर की राजनीति में उबाल आ गया है और रुबीना इकबाल के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की जा रही है। शहर के सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा है कि विकास और जनहित के मुद्दों के बजाय सदन को व्यक्तिगत और धार्मिक आधार पर चुनौती देने का अखाड़ा बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
अब सबकी नजरें निगम अध्यक्ष के आगामी फैसले पर टिकी हैं कि वे सदन की मर्यादा भंग करने और राष्ट्रीय भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले इस बयान पर क्या रुख अपनाते हैं, जबकि विपक्षी खेमे में इस बयान को लेकर फिलहाल रक्षात्मक रुख देखा जा रहा है।


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