नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। सरदार पटेल सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय मेरठ द्वारा “घरेलू मध्यस्थता” विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के निदेशक राजेश चन्द्रा (पूर्व न्यायमूर्ति, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रयागराज) के निर्देशन में तथा प्रो.(डॉ.) रीना बिश्नोई, संकायाध्यक्ष, सुभारती लॉ कॉलेज के संरक्षण में संपन्न हुआ।
इस सत्र के मुख्य वक्ता अधिवक्ता साजू जैकब (सर्वोच्च न्यायालय, भारत; सॉलिसिटर, ब्रिटेन एवं सदस्य, कोलोन बार काउंसिल, जर्मनी) ने घरेलू मध्यस्थता विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि घरेलू मध्यस्थता वैकल्पिक विवाद समाधान का एक महत्वपूर्ण रूप है, जिसमें किसी देश के भीतर उत्पन्न विवादों को मध्यस्थ (Arbitrator) के माध्यम से सुलझाया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत में घरेलू मध्यस्थता का दायरा मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 (Arbitration and Conciliation Act) के अंतर्गत आता है, जो इसे त्वरित, गोपनीय और किफायती बनाता है। इस प्रक्रिया में वाणिज्यिक, अनुबंध तथा साझेदारी से जुड़े विवादों का समाधान अदालत के बाहर किया जाता है। उन्होंने अपने व्याख्यान को संवादात्मक बनाते हुए विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से प्रश्नोत्तर भी किए और किराया नियंत्रण अधिनियम तथा भारतीय संविदा अधिनियम के उदाहरणों के माध्यम से विषय को सरल और रोचक ढंग से समझाया।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. आफरीन अलमास द्वारा अतिथि स्वागत उद्बोधन से हुई तथा समापन प्रो.(डॉ.) प्रेमचंद द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. सारिका त्यागी, प्रो. टी.एन. प्रसाद, शालिनी गोयल, सोनल जैन, अरशद आलम, शिवानी, हर्षित, अनुराग चौधरी, पार्थ मल्होत्रा, आशुतोष देशवाल सहित अनेक शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

No comments:
Post a Comment