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Thursday, April 2, 2026

सुभारती विश्वविद्यालय में 17वें पालि दिवस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य आयोजन



नित्य संदेश ब्यूरो

 मेरठ। भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार की सांस्कृतिक एवं शैक्षिक नीतियों के अनुरूप प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन एवं वैश्विक प्रसार की दिशा में स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ में “17वें पालि दिवस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का गरिमामय एवं सफल आयोजन किया गया। इस वर्ष सम्मेलन का मुख्य विषय पालि साहित्य में समानता एवं बंधुत्व रहा, जो वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में सामाजिक समरसता, नैतिक मूल्यों एवं मानव एकता को सुदृढ़ करने की दृष्टि से अत्यंत प्रासंगिक रहा। यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन त्रिपिटकाचार्य भिक्षु धर्मरक्षित महाथेर की पावन स्मृति को समर्पित था। कार्यक्रम का आयोजन पालि सोसायटी ऑफ इंडिया (PSI) द्वारा तथागत बुद्ध चेयर, सुभारती विश्वविद्यालय तथा अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ के सहयोग से किया गया।


उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कन्फेडरेशननई दिल्ली के निदेशक एवं नव नालंदा महाविहारबिहार के पूर्व कुलपति प्रो. रविन्द्र पन्थ उपस्थित रहे। उन्होंने पालि साहित्य में निहित समानताकरुणा एवं बंधुत्व के सिद्धांतों को आधुनिक वैश्विक समाज के लिए मार्गदर्शक बताते हुए इनके व्यावहारिक अनुप्रयोग पर बल दिया। सम्मेलन के मुख्य वक्ता प्रो. विमलेन्द्र कुमार ने पालि साहित्य की समृद्ध परंपरा, उसकी दार्शनिक गहराई एवं समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला, जबकि विशिष्ट वक्ता प्रो. आनंद वर्धन ने सांस्कृतिक विरासत एवं सामाजिक समरसता के संदर्भ में पालि साहित्य की उपयोगिता को विस्तार से बताया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार शर्मा ने की। उन्होंने पालि भाषा को भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का आधार स्तंभ बताते हुए इसके संरक्षण एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया।


इस अवसर पर त्रिपिटकाचार्य भिक्षु धर्मरक्षित पालि सम्मान” प्रो. रविन्द्र पन्थ को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। सम्मेलन के विभिन्न शैक्षणिक सत्रों में 30 से अधिक शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें भारत सहित कोरिया, थाईलैंड, वियतनाम, म्यांमार, श्रीलंका, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड्स, भूटान एवं नेपाल के विद्वानों ने सहभागिता कर विषय पर गहन चर्चा की। समापन सत्र में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रो. सी. उपेन्द्र राव ने भारतीय ज्ञान परंपरा और पालि अध्ययन की वैश्विक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। साथ ही डॉ. सत्येन्द्र पाण्डेय, वे. डॉ. भिक्षु अनालयो एवं डॉ. अरविन्द ऋतुराज ने भी अपने विचार व्यक्त किए और ऐसे आयोजनों को ज्ञान-विनिमय का सशक्त माध्यम बताया।


डॉ. हीरो हितो के मार्गदर्शन में आयोजित इस सम्मेलन ने अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक संवाद को नई दिशा दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीषा लूथरा एवं डॉ. विवेक कुमार ने कियाजबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ज्ञानादित्य शाक्य एवं डॉ. चम्पालाल ने प्रस्तुत किया। यह सम्मेलन शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं नीतिगत दृष्टि से अत्यंत सफल एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ, जिसने भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक प्रसार को सशक्त गति प्रदान की।

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