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Thursday, April 16, 2026

व्यंग्य टिंचर आयोडीन की तरह है जो जलन करता है लेकिन वह घाव को ठीक कर देता है – श्री सूर्यकांत नागर

नित्य संदेश ब्यूरो 

इंदौर।  नगर की साहित्य संस्था क्षितिज के द्वारा किए गए आयोजन में शहर के ख्यात व्यंग्यकार और लेखक श्री नंदकिशोर बर्वे के नवीन व्यंग्य संग्रह  "काले धन के बोनसाई" पर श्री अहिल्या केंद्रीय पुस्तकालय के गोष्ठी कक्ष में आयोजित पुस्तक चर्चा में वरिष्ठ साहित्यकार श्री सूर्यकांत नागर ने अपने उद्बोधन में कहा कि व्यंग्य टिंचर आयोडीन की तरह है जो जलन करता है लेकिन वह घाव को ठीक कर देता है। लेखक नंदकिशोर बर्वे एक कथाकार भी हैं, उनकी कहानियों में भी व्यंग्य दिखता है।    

वरिष्ठ व्यंग्यकार श्री जवाहर चौधरी ने पुस्तक पर चर्चा करते हुए कहा कि व्यंग्य लेखन बहुत आसान काम नहीं है। क्रोध से व्यंग्य का जन्म होता है। व्यंग्य लिखना साहस का काम है। लेखक की भाषा एकदम सरल है, तुरंत संप्रेषित होती है। इनकी अधिकांश व्यंग्य रचनाएं नाटकीयता के साथ सामने आती है। लेखक बिना किसी शोरगुल के समाज में व्याप्त विसंगतियों को शिष्टता से सामने लाते हैं। 

वरिष्ठ साहित्यकार एवं लघुकथाकार श्री योगेन्द्रनाथ शुक्ल ने अपने उद्बोधन में कहा कि व्यंग्य परंपरा अत्यंत प्राचीन है। हमारे यहां लोकगीतों, मुहावरे, कहावतें में यह प्रचुर मात्रा में विद्यमान है। व्यंग्यकार समाज सुधारने के लिए सिग्नल देता है, इसलिए प्रत्येक व्यंग्यकार समाज सुधारक होता है। रसायन शास्त्र में जैसे 'कैटेलिस्ट' होते हैं ,वैसे ही व्यंग्य भी सामाजिक, वैचारिक परिवर्तन करने वाला 'कैटलिस्ट' है। लेखक की कृति में समयबोध स्पष्ट झलकता है और समाज में हो रहे हो सामाजिक मूल्यों की बुराइयों पर लेखक ने शिष्ट प्रहार किए हैं। कृति पठनीय है।

अतिथियों का स्वागत श्री अश्विनीकुमार दुबे, श्री ब्रजेश कानूनगो और श्री नंदकिशोर बर्वे द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती रश्मि चौधरी और आभार प्रदर्शन श्री सुरेश रायकवार द्वारा किया गया। कार्यक्रम में शहर के कई वरिष्ठ साहित्यकार उपस्थित थे।

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