राहुल गौतम
नित्य संदेश, मेरठ। मेरठ कचहरी में मंगलवार को संविधान निर्माता प्रथम कानून मंत्री बाबा डॉ0 भीमराव आंबेडकर के 135वें जन्मदिवस बड़ी धूमधाम से मनाया गया। पंडित नानक चंद सभागार में सीनियर एडवोकेट धर्मेंद्र कुमार मीवा के नेतृत्व में बाबा साहब के चित्र पर एससी अधिवक्ता समाज के अधिवक्ताओं ने माल्यार्पण किया। साथ ही सभी अधिवक्ता इकट्ठा होकर कचहरी चौराहा स्थित बाबा साहब डॉ0 भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर पहुंचे।
इस मौके पर सीनियर अधिवक्ता मेरठ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष/महामंत्री व वर्तमान सदस्य बार कॉउन्सिल ऑफ यूपी, सीनियर एडवोकेट रोहिताश्व कुमार अग्रवाल ने बाबा साहब की मूर्ति पर माल्यार्पण किया। इस दौरान उन्होंने उपस्थित अधिवक्ताओं को सम्बोधित करते हुए बाबा साहब के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा, कि बाबा साहब ने अपना पूरा जीवन गरीब, मजदूर, पिछड़ो के लिए बलिदान कर दिया। उन्होंने बताया कि बाबा साहब ने खुद कहा था, कि दलित कमजोर प्रगति के किसी भी पथ पर आगे बढ़ें, जाति का राक्षस रास्ता रोक कर खड़ा मिलता है। हमारा संघर्ष धन-संपत्ति के लिए नहीं मानवीय गरिमा के लिए है। मेरा जीवन संघर्ष ही मेरा संदेश है। उन्होंने बताया कि जब हम बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का नाम लेते हैं, तभी संविधान भी हमारे दिमाग में कौंध जाता है। दरअसल बाबा साहब ही देश के एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिनकी मूर्ति के हाथ में संविधान होता है। इसे आप संसद से लेकर शहरों गांव-कस्बों में भी देख सकते हैं। बाबासाहेब अंबेडकर और संविधान को देश की जनता साथ-साथ देखती है। इसलिए आज संविधान बचाने की लड़ाई के नेता या नई ज़ुबान में कहें तो पोस्टर बॉय बाबा साहब हैं।
सीनियर अधिवक्ता धर्मेंद्र कुमार मीवा ने बाबा साहब कि मूर्ति पर माल्यार्पण किया और आपने सम्बोधन में बाबा साहब द्वारा दियें गए संविधान की शान में बोलते हुए कहा, कि संविधान हम दलितों, वंचितों, महिलाओं और आदिवासियों को वे अधिकार देता है, जो पहले कभी नहीं मिले। हमारे लिए बराबरी गरिमा और आजादी से प्यारा और कुछ नहीं है। इसलिए हमें बाबा साहब बहुत प्यारे हैं और संविधान जान से प्यारा है। संविधान पर हमला हमें बाबा साहब पर हमला लगता है। संविधान वह आग है, जिसमें गैर बराबरी और छुआछूत को जलाया जा सकता है। एससी अधिवक्ता समाज अध्यक्ष सीनियर अधिवक्ता एडवोकेट शीशपाल सिंह ने कहा कि हमें भी कहना होगा ‘मैं भी अंबेडकर’ संविधान हमें प्यारा है और हमें हर हाल में इसे बचाना है। डॉ. बी.आर. अंबेडकर, जिन्हें हम सम्मान से ‘बाबासाहब’ कहते हैं, केवल भारतीय संविधान के निर्माता ही नहीं थे, बल्कि वे एक समाजशास्त्री, अर्थशास्त्री और महान मानवाधिकारवादी थे। उनका भारत केवल भौगोलिक सीमाओं का समूह नहीं, बल्कि एक ऐसा जीवंत समाज था, जहाँ हर नागरिक को सम्मान के साथ जीने का अधिकार हो। उन्होंने हमेशा जातिविहीन समाज के निर्माण का ख्वाब देखा था। बाबा साहब का मानना था, कि राजनीतिक लोकतंत्र तब तक सफल नहीं हो सकता, जब तक कि उसके मूल में सामाजिक लोकतंत्र न हो।
एडवोकेट रविंद्र कुमार रोहटा ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि, वे एक ऐसे भारत का निर्माण करना चाहते थे, जहाँ मनुष्य की पहचान उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके गुणों और कर्मों से हो। उनके लिए ‘जाति’ प्रगति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा थी। उन्होंने अस्पृश्यता का अंत किया। उन्होंने छुआछूत जैसी कुप्रथा को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया था, ताकि दलित और पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा में सम्मानजनक स्थान मिल सके। एडवोकेट बबलू कुमार रोहटा ने बाबा साहब के जीवन पर रौशनी डालते हुए कहा, कि बाबा साहब हमेशा स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का सिद्धांत दिया। साथ ही नारी उत्थान कि बात की। नारी सशक्तिकरण का नारा देते हुए शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो पर जोर दिया। बताया कि बाबा साहब कहते थे, “मैं किसी समुदाय की प्रगति का मापन उस प्रगति से करता हूँ, जो वहाँ की महिलाओं ने हासिल की है, क्योंकि बाबा साहब चाहते थे, कि किसी को उसकी जाति के कारण अपमानित न होना पड़े। हर महिला सुरक्षित और स्वतंत्र महसूस करे। विज्ञान और तर्क पर आधारित सोच हो।
एडवोकेट भूषण सिंह वर्मा, एडवोकेट दिनेश कुमार वारिया ने कहा कि आज समय है, कि हम बाबा साहब के सपने के भारत को साकार बनाएं। आइए, संकल्प लें हम केवल बाबा साहब की जय-जयकार न करें, बल्कि उनके बताए हुए ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’ के मंत्र को अपने जीवन में उतारें। उनके सपनों का भारत बनाने की जिम्मेदारी अब हमारे कंधों पर है। इस अवसर पर एडवोकेट सुंदरलाल, एडवोकेट सुखवीर सिंह, एडवोकेट अनिल सुरानिया सपना सुंदर, भूपेंद्र, एडवोकेट अमित शर्मा आदि मौजूद रहे।

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