नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानंद के विचारों, आदर्शों और राष्ट्र निर्माण संबंधी संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सतत कार्यरत स्वामी विवेकानंद शोध पीठ, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ को एक प्रतिष्ठित अवसर पर सम्मानित किया गया। यह सम्मान विवेकानंद संग्रहालय, रामकृष्ण मिशन तथा स्वामी विवेकानंद का पैतृक आवास एवं सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान प्रदान किया गया। यह उपलब्धि न केवल विश्वविद्यालय के लिए, बल्कि पूरे मेरठ क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।
इस अवसर पर शोध पीठ की प्रोफेसर एवं संयोजिका प्रो. (डॉ.) मोनिका मेहरोत्रा ने स्वामी विवेकानंद की जन्मस्थली का विस्तृत भ्रमण किया। उन्होंने उस ऐतिहासिक कक्ष का अवलोकन किया, जहां स्वामी विवेकानंद अपने परिवारजनों के साथ निवास करते थे। यह स्थान आज भी उनके बाल्यकाल, पारिवारिक संस्कारों और व्यक्तित्व निर्माण की प्रेरक स्मृतियों को सजीव रूप में संजोए हुए है। डॉ. मेहरोत्रा ने परिसर में स्थित प्राचीन बंगला हवेली की भव्य स्थापत्य कला, पारिवारिक आंगन तथा उस समय की सांस्कृतिक विरासत का भी अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपने महापुरुषों के जीवन से जोड़ने का सशक्त माध्यम है।
भ्रमण के दौरान उन्होंने फोटो गैलरी, जीवन यात्रा प्रदर्शनी, ध्यान कक्ष, प्रार्थना स्थल तथा संग्रहालय के अन्य अनुभागों का भी अवलोकन किया। इन सभी स्थलों पर स्वामी विवेकानंद के जीवन के विभिन्न चरणों, उनके आध्यात्मिक चिंतन, राष्ट्रभक्ति, युवाओं के प्रति संदेश तथा विश्व मंच पर भारत की संस्कृति को स्थापित करने में उनके योगदान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
इस अवसर पर विवेकानंद संग्रहालय के सचिव, स्वामी ज्ञानलोकानन्द जी द्वारा स्वामी विवेकानंद शोध पीठ को सम्मानित किया गया। यह सम्मान शोध पीठ द्वारा स्वामी विवेकानंद के विचारों पर आधारित शैक्षिक कार्यक्रमों, व्याख्यानमालाओं, सेमिनारों, युवा जागरण अभियानों तथा विद्यार्थियों के बीच उनके आदर्शों के प्रचार-प्रसार के लिए प्रदान किया गया।
सम्मान ग्रहण करते हुए डॉ. मोनिका मेहरोत्रा ने कहा कि यह सम्मान केवल एक संस्था का नहीं, बल्कि उन सभी शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों का है जो स्वामी विवेकानंद के विचारों को समाज तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे, और युवाओं को आत्मविश्वास, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति एवं सेवा भाव अपनाकर आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि स्वामी विवेकानंद शोध पीठ भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा, जिनसे छात्र-छात्राओं को उनके व्यक्तित्व और कृतित्व से प्रेरणा मिल सके। विश्वविद्यालय स्तर पर शोध परियोजनाएं, विचार गोष्ठियां, संगोष्ठियां, निबंध प्रतियोगिताएं एवं प्रेरक व्याख्यान निरंतर आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य युवाओं में सकारात्मक चेतना का विकास करना है।

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