नित्य संदेश, मेरठ। शास्त्री नगर सेंट्रल मार्केट से जुड़ा सीलिंग विवाद अब और ज्यादा गरमा गया है। आवास विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि “मिठाई” के खेल में कार्रवाई की दिशा और सूची दोनों बदल दी गईं।
एडवोकेट ठाकुर अंजनये सिंह ने बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया कि जो सीलिंग लिस्ट 4 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में जमा होनी थी, वह 2 अप्रैल को ही बाहर कैसे आ गई? इससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सीधा सवाल खड़ा होता है।
सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि कैलाश डेरी के मालिक जीतेन्द्र अग्रवाल उर्फ अट्टू के पास यह सूची qपहले ही पहुंच गई थी। आरोप है कि आवास विकास के एक अधिकारी द्वारा लिस्ट पहले साझा की गई, जो सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के दायरे में आ सकता है।
इतना ही नहीं, पहले जारी सूची में 56 नाम शामिल थे, लेकिन बाद में 12 नाम रहस्यमय तरीके से हटा दिए गए। एडवोकेट अंजनये सिंह का आरोप है कि अधिकारियों ने “मलाई खाकर” इन नामों को हटाया, जिसकी शिकायत उच्च स्तर पर की गई है। वहीं, स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में कई अवैध निर्माण खुलेआम जारी हैं।
एक ही कारोबारी द्वारा आधा दर्जन से ज्यादा व्यावसायिक निर्माण खड़े कर दिए गए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। यहां तक कि एक नया शोरूम भी बन रहा है, जिस पर विभाग की चुप्पी सवालों के घेरे में है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि विभाग की नीति अब “पहले मिठाई, फिर कार्रवाई” जैसी हो गई है—जैसा पहले भी कुछ मामलों में देखने को मिला।
बड़ा सवाल यही है:
क्या कार्रवाई निष्पक्ष हो रही है या “सेटिंग” के आधार पर नाम जोड़े और हटाए जा रहे हैं?
मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में इस पर और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
No comments:
Post a Comment