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Sunday, April 12, 2026

सुभारती विश्वविद्यालय के गौरव में जुड़ा एक और स्वर्णिम अध्याय “स्वामी विवेकानंद सेवा उत्कृष्टता पुरस्कार 2026” से नवाजा गया

नित्य संदेश ब्यूरो 

मेरठ। स्वामी विवेकानंद शोध पीठ एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालयमेरठ को उनके उत्कृष्टसमर्पित एवं समाजोन्मुखी कार्यों के लिए वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित स्वामी विवेकानंद सेवा उत्कृष्टता पुरस्कार” प्रदान किया गया। यह सम्मान डाकिन कालिकाता क्रीरा ओ संस्कृति परिषद (सेवा प्रतिष्ठान) द्वारा अजय कुमार दास सेवा फाउंडेशन के सहयोग से प्रदान किया गया। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय परिवार के लिए अत्यंत गौरव और प्रेरणा का विषय हैजो शिक्षासंस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में निरंतर उत्कृष्ट कार्य कर रहा है।


 

यह पुरस्कार स्वामी विवेकानंद शोध पीठ द्वारा किए जा रहे उन बहुआयामी प्रयासों का परिणाम हैजो समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वामी जी के विचारों को पहुँचाने के लिए समर्पित हैं। शोध पीठ केवल एक शैक्षणिक इकाई नहींबल्कि एक वैचारिक आंदोलन बन चुकी है। यहाँ नियमित रूप से आयोजित होने वाले सेमिनारकार्यशालाएंपुस्तक प्रदर्शनियां और पैनल चर्चाएं विद्यार्थियों के भीतर केवल किताबी ज्ञान ही नहींबल्कि चरित्र निर्माण और नैतिक मूल्यों का बीजारोपण कर रही हैं। इस गरिमामयी अवसर पर शोध पीठ की संयोजिका प्रो. (डॉ.) मोनिका मेहरोत्रा को उनके अथक परिश्रम और विजनरी नेतृत्व के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उनके कार्यकाल में शोध पीठ ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। सम्मान ग्रहण करने के उपरांत प्रो. मेहरोत्रा ने एक ओजस्वी संबोधन दियाजिसमें उन्होंने स्वामी जी के जीवन दर्शन की आधुनिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।



अपने संबोधन में प्रो. मेहरोत्रा ने 1893 के शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन का स्मरण कराते हुए कहा कि स्वामी जी ने भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठता से पूरे विश्व को चकित कर दिया था। उन्होंने कहा, "स्वामी जी के लिए शिक्षा का अर्थ सूचनाओं का ढेर नहींबल्कि मनुष्य निर्माण था। सुभारती विश्वविद्यालय इसी 'नर सेवा ही नारायण सेवाके सिद्धांत को अपना आधार मानता है।" उन्होंने स्वामी जी के चार योगोंकर्मयोगज्ञानयोगभक्तियोग और राजयोगकी व्याख्या करते हुए बताया कि कैसे ये सिद्धांत आज के तनावपूर्ण दौर में युवाओं के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं। प्रो. मेहरोत्रा ने विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण और न्यायपूर्ण समाज की स्थापना में स्वामी जी के योगदान को रेखांकित किया।



विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार शर्मा और मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.) शल्या राज ने इस बड़ी उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने संयुक्त रूप से कहा कि यह सम्मान विश्वविद्यालय के प्रत्येक सदस्य की निष्ठा का फल है। उठोजागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” के उद्घोष के साथस्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय अब और अधिक ऊर्जा के साथ अपने मिशन में जुट गया है। यह पुरस्कार केवल एक ट्रॉफी नहींबल्कि एक जिम्मेदारी हैआने वाली पीढ़ी को एक जिम्मेदार नागरिक बनाने की और भारत को पुनः विश्व गुरु के पद पर आसीन करने की। 


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