नित्य संदेश ब्यूरो
नई दिल्ली। एसोचैम राष्ट्रीय शिक्षा परिषद द्वारा शोभित विश्वविद्यालय के सहयोग से “डिजिटल इकोसिस्टम एवं उद्योग साझेदारी के माध्यम से उच्च शिक्षा में परिवर्तन” विषय पर एक राष्ट्रीय गोलमेज बैठक आयोजित की गई, जिसमें मुख्य शिक्षाविदों, उद्योग जगत के वरिष्ठ मानव संसाधन विशेषज्ञों, तकनीकी क्षेत्र के जानकारों तथा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर उच्च शिक्षा की बदलती दिशा पर गंभीर विचार-विमर्श किया।
बैठक की अध्यक्षता कुँवर शेखर विजेंद्र, अध्यक्ष, राष्ट्रीय शिक्षा परिषद, एसोचैम एवं कुलाधिपति, शॉभित विश्वविद्यालय ने की।
अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं रह सकती। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य ऐसे युवाओं का निर्माण है जो ज्ञान के साथ विवेक, तकनीक के साथ संवेदना, और योग्यता के साथ उत्तरदायित्व लेकर समाज में प्रवेश करें। उन्होंने कहा कि आज उद्योग जगत जिस कौशल की अपेक्षा कर रहा है, उसमें केवल विषयगत जानकारी पर्याप्त नहीं है। संवाद क्षमता, आत्मविश्वास, समस्या को समझने की क्षमता, सामूहिक कार्यशैली और बदलते परिवेश में स्वयं को ढालने की तैयारी उतनी ही आवश्यक है। यदि शिक्षा इन आयामों को पर्याप्त गहराई से नहीं छूती, तो डिग्री और जीवन के बीच दूरी बनी रहती है।
बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने भी इस बात पर चिंता व्यक्त की कि अनेक प्रतिभाशाली युवाओं में ज्ञान तो है, परंतु कार्यस्थल की व्यवहारिक अपेक्षाओं को समझने और प्रभावी संवाद स्थापित करने में अभी भी कमी दिखाई देती है। शिक्षाविदों का मानना था कि उद्योग और विश्वविद्यालयों के बीच संबंध केवल रोजगार देने और पाने का नहीं होना चाहिए। पाठ्यक्रम निर्माण, इंटर्नशिप, संयुक्त शोध, नवाचार प्रयोगशालाएँ, और उद्योग के वास्तविक प्रश्नों को विश्वविद्यालयों के अध्ययन और शोध से जोड़ना समय की माँग है। उन्होंने कहा कि शोध तब अधिक सार्थक होता है जब वह पुस्तकालयों की सीमाओं से निकलकर समाज और उत्पादन की वास्तविक चुनौतियों से संवाद करे। विश्वविद्यालयों के पास विचार हैं, उद्योग के पास अनुभव है; जब दोनों मिलते हैं तभी नवाचार जीवित होता है।
चर्चा के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल शिक्षा प्रणाली और बदलते रोजगार परिवेश पर भी विचार हुआ। इस अवसर पर यह भी कहा गया कि तकनीक ने मानव की क्षमता अवश्य बढ़ाई है, परंतु तकनीक अपने आप में परिपक्वता नहीं देती। परिपक्वता शिक्षा के भीतर से आती है। कार्यक्रम के संचालन और समन्वय में डॉ. अंबिका शर्मा, सहायक महासचिव, एसोचैम तथा डॉ. स्वाति शर्मा, वरिष्ठ निदेशक, एसोचैम की सक्रिय भूमिका रही। बैठक में यह साझा भावना उभरी कि यदि भारत को ज्ञान-समर्थ, आत्मविश्वासी और भविष्य के लिए तैयार राष्ट्र बनना है, तो शिक्षा और उद्योग के बीच संवाद को अधिक गहरा, सतत और उद्देश्यपूर्ण बनाना होगा।
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