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Friday, February 27, 2026

सुभारती विश्वविद्यालय में राष्ट्र-चरित्र और इतिहास-गौरव जागृति हेतु महापर्व आयोजनों की घोषणा



नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय एक ऐसा संस्थान हैं जहाँ राष्ट्र सर्वप्रथम” का सिद्धांत केवल उदघोष नहींबल्कि सनातन जीवन मूल्य के रूप में प्रतिष्ठित है। यहाँ इस विचार को सर्वोपरि स्थान देने के साथ-साथ प्रतिदिन उसके व्यावहारिक अनुपालन का सतत और सुदृढ़ प्रयास किया जाता है। यदि हम इस तथ्य को विस्तार से देखेंतो अनेक उदाहरण ऐसे मिलते हैंजो इसे किसी भी प्रकार की अतिशयोक्ति नहीं रहने देते!  आज के समय में जहाँ अनेक कॉलेजोंसंकायोंछात्रावासोंभवनोंसड़कों तथा खेल मैदानों के नाम प्रायः व्यक्तियों या परिवारों के नाम पर रखे जाते हैंवहीं सुभारती विश्वविद्यालय में इन स्थलों का नामकरण हमारे अमर बलिदानी स्वतंत्रता सेनानियों और महान राष्ट्र नायकों के स्मरण में किया गया है।


इसी क्रम में विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित भव्य एवं अद्वितीय शहीद स्मारक विशेष रूप से उल्लेखनीय हैयह स्मारक इकलौता ऐसा स्मारक है जहाँ पर स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान देने वाले आजाद हिन्द सेना के सभी वीर शहीदों के नाम अंकित हैं और साथ ही स्वतंत्रता प्राप्त होने के पश्चात के सशस्त्र सेनाओं के सभी बलिदानी सैनिकों के नाम भी अंकित हैं जिन्होंने स्वतंत्रता को क़ायम रखने में अपने प्राणों की आहुति दे दीयहाँ हर एक शहीद के नाम से लगे एक एक पेड़ उन अमर वीर सपूतों की पावन स्मृति को समर्पित हैजिन्होंने कारगिल युद्ध में मातृभूमि की रक्षा हेतु अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान अर्पित कर भारत माता का मस्तक गौरव से ऊँचा किया। जैसे-जैसे ये वृक्ष विकसित होकर विशाल होते जाएंगेउनकी शीतल छाया हमारी आने वाली पीढ़ियों को उन अमर वीरों के त्याग और बलिदान की स्मृति निरंतर कराती रहेगीजिन्होंने देश की रक्षा हेतु अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।


इसी प्रकार संस्थान के विभिन्न भवनों एवं परिसरों के नाम भी महान सपूतों और स्वतंत्रता सेनानियों की पावन स्मृति में समर्पित हैं, जैसे- लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम पर,सरदार पटेल सुभारती इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ, 'हिन्द की चादरराष्ट्र-धर्म रक्षक गुरु तेग बहादुर के नाम पर गुरु तेग बहादुर ऑडिटोरियमतथा हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक  छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर छत्रपति शिवाजी अस्पतालऐसे अनेक उदहारण है जो राष्ट्र गौरव की इस भावना को सुभारती के राष्ट्र सर्वप्रथम की भावना को उजागर करते है।


भारत माता के महान सपूत नेताजी सुभाषचंद्र बोस के त्यागतप और अद्वितीय नेतृत्व को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य भी विश्वविद्यालय की इसी राष्ट्रनिष्ठ धारा का अंग है। अनेक ऐसे ऐतिहासिक तथ्य हैंजो अभी व्यापक रूप से जनसामान्य तक नहीं पहुंच सके हैं। इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इसी क्रम में 21 अक्टूबर को अखंड भारत स्वतंत्रता दिवस महापर्व” के अवसर पर विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है।

स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण सदैव विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्तिनैतिक मूल्योंचिंतनशीलता एवं सृजनात्मकता के विकास के लिए प्रतिबद्ध रहे हैं। विश्वविद्यालय की कार्य-संस्कृति उसके चार वैचारिक स्तंभों- शिक्षासेवासंस्कार एवं राष्ट्रीयता’ पर आधारित हैजो विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास तथा राष्ट्र निर्माण की भावना को सुदृढ़ करती है। 21 अक्टूबर2026 को अखंड भारत स्वतंत्रता दिवस महापर्व” के अवसर पर वाद-विवादनिबंध लेखनचित्रकला (पेंटिंग) तथा प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा।


इन प्रतियोगिताओं का विषय चरित्र— राष्ट्रीय चरित्रनेताजी सुभाषचंद्र बोसआज़ाद हिन्द सेना तथा  स्वाधीनता आंदोलन” निर्धारित किया गया है।  आयोजन के प्रमुख उद्देश्य हैं- विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चरित्रसमर्पण और राष्ट्रीय एकता की भावना को सुदृढ़ करनानेताजी के जीवननेतृत्व और त्याग से युवाओं को प्रेरणा प्रदान करनाउनकी रचनात्मक एवं विश्लेषणात्मक क्षमता का विकास करनाआत्मविश्वास एवं प्रस्तुतीकरण कौशल को प्रोत्साहित करनातथा स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास के प्रति ज्ञान और गौरव की भावना जागृत करना।  हमारा मानना है कि 21 अक्टूबर को प्रत्येक वर्ष स्वतंत्रता दिवस को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाना चाहिए  


यह प्रतियोगिता दो चरणों में आयोजित की जाएगी। प्रथम चरण में विद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर पर प्रतियोगिताएँ होंगीजिनमें प्रतिभागी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। इस चरण में महापर्व आयोजन समिति का एक प्रतिनिधि अथवा पर्यवेक्षक उपस्थित रहेगा। द्वितीय चरण में प्रत्येक संस्थान से चयनित विजेता विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय परिसर में आमंत्रित किया जाएगाजहाँ वे अंतिम प्रस्तुति देंगे। प्रत्येक प्रतियोगिता में प्रथमद्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र एवं सु-भारत कार्ड प्रदान किए जाएँगे। द्वितीय चरण के विजेताओं को विशेष सम्मान एवं पुरस्कार दिए जाएँगेजबकि सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा। यह आयोजन मात्र एक प्रतियोगिता नहींबल्कि युवा पीढ़ी में स्वाधीनतासाहसनेतृत्व और राष्ट्र निर्माण की चेतना जागृत करने का प्रेरक अभियान हैजिससे विद्यार्थी नेताजी के आदर्शों से प्रेरणा लेकर एक सशक्तसमर्पित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना योगदान दे सकें।


हमें पूर्ण विश्वास है कि इस राष्ट्रीय मुहिम में नेताजी का यह कथन सदैव प्रेरणा देगा— “अपने देश के प्रति सदैव वफादार रहने वालेअपने प्राणों की आहुति देने के लिए तत्पर सैनिक अजेय होते हैं।” आगामी रंगों के पर्व होली पर हम आकाश में तिरंगे के रंगों से यह संकल्प लिखें— “हम होंगे  कामयाब।” स्मरण रहे कि 1857 में मेरठ की धरती से ही प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक क्रांति का शंखनाद हुआ था। अतः आइएएक बार पुनः उसी क्रांतिकारी चेतना को जागृत करते हुएसंगठित होकर एक नई राष्ट्रीय जागृति का सूत्रपात मेरठ से करें।


अगर आप भी सच्चे भारतीय बनकर कदम से कदम मिला देश सेवा में लगकर साथ चलना चाहते हैं या अन्य किसी प्रकार की दुविधा के लिए संपर्क करें 9818135198 पर इस महापर्व के प्रमुख आयोजक  कर्नल राजेश त्यागीसेना मेडल (सेवा निवृत) से जय हिन्द


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