Breaking

Your Ads Here

Tuesday, February 10, 2026

रामराज में विराट हिंदू सम्मेलन आयोजित, संस्कृति संस्कारों और गौरवशाली इतिहास पर चिंतन




अर्जुन देशवाल

नित्य संदेश, बहसूमा। मंगलवार को रामराज कस्बे में मेरठ बिजनौर मार्ग के पास स्थित रामलीला मैदान में सकल हिंदू समाज द्वारा एक विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया।यह सम्मेलन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में आयोजित किया गया। 

कार्यक्रम का हवन पूजन के साथ हुआ। इस दौरान हिंदू संस्कृति संस्कार और भारत के गौरवशाली इतिहास पर विस्तृत चर्चा हुई वक्ताओं ने समाज से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर संस्कारों को अपनाने का आह्वान किया, ताकि राष्ट्र सशक्त बना सके। कार्यक्रम का शुभारंभ विभाग सामाजिक समरसता संयोजक सुरेश कुमार,संत शाश्वतांनंद महाराज व मास्टर धनेश बंसल ने भारत माता की आरती के साथ विधिवत रूप से किया।कार्यक्रम की अध्यक्षता मास्टर धनेश बंसल ने तथा संचालन अंकुश शर्मा ने किया। मुख्य वक्ता संत शाश्वतांनंद महाराज उपस्थित रहे। इन सभी ने भारत माता की आरती के साथ विधिवत रूप से सम्मेलन का उद्घाटन किया।सम्मेलन के मुख्य वक्ता संत शाश्वतांनंद महाराज ने अपने संबोधन में समरसता का उदाहरण देते हुए कहा कि विश्व में केवल भारत को ही मां का दर्जा प्राप्त है। उन्होंने भगवान राम के जीवन से उदाहरण दिए, जैसे शबरी के झूठे बेर खाना और जटायु का अंतिम संस्कार करना जो समरसता के प्रतीक है। 

उन्होंने कहा कि डॉक्टर हेडगेवार ने देश की गुलामी के कारणों पर विचार किया। उन्होंने राम,कृष्ण, सरस्वती और डॉक्टर अंबेडकर जैसे महापुरुषों का उल्लेख किया जिन्होंने भारत को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए कार्य किया। उन्होंने प्रभु श्री राम मंदिर निर्माण को हिंदू समाज के विजय का उदाहरण बताया और कहा कि भारतीय संस्कृति की योग परंपरा को पूरा विश्व अपना रहा है।वहीं उन्होंने वर्तमान में हिंदू समाज के सामने कई चुनौतियों पर प्रकाश डाला उन्होंने लव जिहाद को पहली चुनौती बताते हुए इसके प्रति जन जागरण की आवश्यकता पर जोर दिया।उन्होंने कश्मीर में हुई घटनाओं का जिक्र किया और लैंड जिहाद तथा घुसपैठ को राजनीतिक दलों द्वारा प्रमाण पत्र दिए जाने की समस्या पर भी विचार करने को कहा।

वही उन्होंने धर्मांतरण को तीसरी और जनसंख्या असंतुलन को चौथी प्रमुख समस्या बताया, जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। कार्यक्रम के अंत में मां भारती की आरती के साथ सम्मेलन का समापन हुआ। वही अंत में संत शाश्वतांनंद महाराज ने भारत भूमि पर जन्म लेने को सौभाग्यशाली बताया उन्होंने कहा कि हमारे पास प्रभु श्री राम की मर्यादा,भगवान श्री कृष्ण की कूट नीति, स्वामी दयानंद की क्रांति और भगवान बुद्ध व महावीर के शांति संदेश है उन्होंने सनातन हिंदू धर्म को विश्व का सबसे प्राचीन और व्यापक धर्म भी बताया।

इस अवसर पर रामराज खंड के माननीय खंड संघचालक मास्टर ब्रह्मचारी, डॉक्टर श्रीपाल कोहली, विपिन मनचंदा,केपी धीमान, सुदर्शन गोयल, विपेंद्र सुधा वाल्मीकि, पंडित विधि चंद शर्मा, विजय तोमर,अजय तोमर, विशाल राठी,सचिन बैंसला आदि सैकड़ो लोग मौजूद रहे।

No comments:

Post a Comment

Your Ads Here

Your Ads Here