सपना सीपी साहू
नित्य संदेश, इंदौर। चांद का दीदार होने के साथ ही बरकतों और रहमतों के पवित्र महीने रमजान का आगाज हो गया है। भारत में 19 फरवरी 2026 को पहला रोजा रखा जा रहा है। इस्लामी कैलेंडर के इस नौवें महीने का पूरी दुनिया के साथ देश भर में शिद्दत से इंतजार किया जा रहा था, जो अब इबादत और संयम के साथ शुरू हो चुका है।
रमजानुल मुबारक के इस पाक महीने में रोजेदार सुबह सूरज निकलने से पहले 'सहरी' और शाम को 'इफ्तार' के साथ अपनी साधना पूरी करेंगे। आत्म-अनुशासन के इस पर्व में पांच वक्त की नमाज के साथ-साथ जकात और फितरा जैसे दान-पुण्य का विशेष महत्व है, ताकि समाज का हर वर्ग खुशहाली के साथ इस महीने की इबादत कर सके।
रमजान 2026 के मुख्य और बड़े रोजें
इस वर्ष रमजान के दौरान कुछ विशेष दिन इबादत के लिहाज से बेहद अहम रहेंगे :-
जुमे के रोजे (बड़ा रोजा) - रमजान में शुक्रवार यानी जुमे के दिन का विशेष महत्व होता है। इस बार महीने का पहला जुमा 20 फरवरी को होगा।
वहीं, रमजान का आखिरी जुमा (अलविदा जुमा) - 20 मार्च को पड़ने की उम्मीद है, जिसे बहुत बड़ा और मुकद्दस रोजा माना जाता है।
शब-ए-कद्र (इबादत की बड़ी रातें) - रमजान के आखिरी अशरे (अंतिम 10 दिन) में आने वाली विषम रातों (21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं शब) में 'शब-ए-कद्र' की तलाश की जाती है। इनमें 27वीं रात (संभावित 17 मार्च) को सबसे बड़ी इबादत की रात माना जाता है, जिसमें रात भर जागकर खुदा की बंदगी की जाती है।
ईद-उल-फितर जो 29 या 30 रोजों के मुकम्मल होने के बाद, चांद की तस्दीक होने पर 20 या 21 मार्च को ईद-उल-फितर का त्योहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
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