नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। मेडिकल कॉलेज के स व भा प चिकित्सालय में एक उल्लेखनीय चिकित्सीय उपलब्धि दर्ज की गई, जब मरीज़ 20 वर्षीय युवक नैतिक, जो 01 फरवरी 2026 को राजस्थान के खाटूश्याम क्षेत्र में ऊँचाई से गिरने की दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुआ था, का जटिल रीढ़ीय अस्थिभंग सफलतापूर्वक उपचारित किया गया।
गत 02 फरवरी 2026 को भर्ती किए गए रोगी के विस्तृत परीक्षणों एवं उन्नत रेडियोलॉजिकल जाँचों में तृतीय कटि कशेरुका (एल–3) का अग्र वेज संपीडन अस्थिभंग पाया गया, जबकि सौभाग्यवश उसकी तंत्रिका कार्यक्षमता पूर्णतः सुरक्षित थी। स्थिति की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए 14 फरवरी 2026 को न्यूनतम आक्रामक तकनीक द्वारा पश्च स्थिरीकरण एवं पर्क्यूटेनियस पेडिकल स्क्रू स्थापन की शल्यक्रिया संपन्न की गई। इस जटिल प्रक्रिया का नेतृत्व वरिष्ठ अस्थि शल्य चिकित्सक डॉ. ज्ञानेश्वर टोंक एवं डॉ. सुमित अग्रवाल ने अपनी विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के साथ किया, जबकि मुख्य निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. योगेश मणिक, डॉ. प्रमोद तथा उनकी टीम ने अत्यंत दक्षतापूर्वक निश्चेतना प्रबंधन सुनिश्चित किया।
सूक्ष्म चीरों के माध्यम से विशेष उपकरणों की सहायता से कशेरुकाओं में स्क्रू स्थापित कर रीढ़ को स्थायित्व प्रदान किया गया, जिससे संरचनात्मक संतुलन पुनर्स्थापित हुआ। इस विधि में रक्तस्राव अत्यल्प रहा, मांसपेशीय एवं कोमल ऊतकों की क्षति न्यूनतम रही तथा संक्रमण की संभावना भी कम हुई। शल्योपरांत रोगी की स्थिति संतोषजनक रही, दर्द में स्पष्ट कमी आई तथा शीघ्र पुनर्वास की दिशा में सकारात्मक प्रगति हुई। यह सफलता आधुनिक न्यूनतम आक्रामक रीढ़ शल्य चिकित्सा, समन्वित टीम कार्य एवं उच्च स्तरीय चिकित्सकीय दक्षता का प्रेरक उदाहरण है। प्राचार्य डॉ आर सी गुप्ता ने उपरोक्त जटिल शल्य प्रक्रिया हेतु टीम को बधाई दी।

No comments:
Post a Comment