नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। शहीद मंगल पांडे राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय माधवपुरम में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का आयोजन, संस्थान नवाचार परिषद एवं जंतु विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वाधान मे किया गया । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं वक्ता प्रोफ़ेसर (डॉ०) यशवेंद्र वर्मा, विभाग अध्यक्ष, विष विज्ञान (टॉक्सिकोलॉजी) विभाग,चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ रहे। महाविद्यालय के परीक्षा एवं 'राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद' प्रभारी प्रोफेसर (डॉ०) सत्यपाल सिंह राणा ने मुख्य अतिथि को प्लांट प्रदान कर सम्मानित किया। महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ०) अंजू सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह दिन नागरिकों में वैज्ञानिक स्वभाव को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखता है तथा वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति को आगे बढ़ाने में युवा प्रतिभाओं की भूमिका पर बल देता है, जो विकसित भारत 2047 की दृष्टिकोण के अनुरूप है।
मुख्य वक्ता प्रोफ़ेसर (डॉ०) यशवेंद्र वर्मा ने 'विज्ञान एवं भारत: प्राचीन से आधुनिक' विषय पर विस्तार से चर्चा की । उन्होंने प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित सर सी.वी. रमन के योगदान को याद करते हुए बताया कि भारत ने प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई है। शून्य , दशमलव एवं पाई की खोज, सुश्रुत द्वारा प्लास्टिक सर्जरी, और आर्यभट के खगोलीय सिद्धांतों से लेकर आज के चंद्रयान-3 मिशन, इसरो तथा कंप्यूटर एवं टेक्नोलोजी आदि की अनेक उपलब्धियां उल्लेखनीय हैं। विश्वप्रसिद्ध तक्षशिला एवं नालंदा विश्वविद्यालय में सम्पूर्ण विश्व से लोग ज्ञानार्जन एवं शोध करने आते थे। उन्होंने बताया कि कैसे मैकाले की शिक्षा पद्धति द्वारा भारतीय संस्कृति ,ज्ञान, दर्शन, परंपरा आदि का ह्रास करने का कुत्सित प्रयास किया गया। उन्होंने बताया कि कैसे बहुत से आविष्कार हमारे ऋषि मुनियों द्वारा किए गए जिनको पाश्चात्य वैज्ञानिकों ने अपनी भाषा में परिवर्तित करके सिद्धांत बनाने का श्रेय ले लिया। उन्होंने विद्यार्थियों से साझा किया कि विष विज्ञान (टॉक्सिकोलॉजी) के जनक कहे जाने वाले पाश्चात्य वैज्ञानिक पैरासेल्सस स्वीकार करते हैं कि उनका प्रसिद्ध कथन जिसके अनुसार "सभी चीजें ज़हर हैं और कुछ भी ज़हर के बिना नहीं है' केवल खुराक ही किसी चीज़ को ज़हर नहीं बनाती है, को आधुनिक विष विज्ञान की आधारशिला माना जाता है। यह कथन आयुर्वेद के सुश्रुत संहिता और चरक संहिता जैसे ग्रंथों से लिया गया है जिसमे वर्णन है कि कोई भी पदार्थ खुराक और उपयोग के आधार पर दवा या ज़हर के रूप में कार्य कर सकता है।
आधुनिक काल में भी भारत ने अंतरिक्ष (मंगलयान, चंद्रयान), रक्षा (मिसाइलें, INS विक्रांत), परमाणु ऊर्जा, और आई.टी. क्षेत्रों,फार्मास्यूटिकल्स (स्वदेशी कोविड टीका) और आई. आई. टी., आई. आई. एस. सी., AIIMS जैसे संस्थानों के माध्यम से भारत न केवल वैज्ञानिक अनुसंधान में आत्मनिर्भर बन रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक ज्ञान अर्थव्यवस्था के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है। मुख्य वक्ता ने बताया कि पेंटियम चिप, यू.एस.बी , एम. पी. ई. जी. आदि महत्त्वपूर्ण डिवाइस के जनक भी भारतीय ही हैं।
प्रोफ़ेसर वर्मा ने अंत में कार्यक्रम में उपस्थित विज्ञान, कला एवं बी.एड की छात्राओं के प्रश्नों और जिज्ञासा का समाधान करते हुए उनको सफलता प्राप्त करने के महत्त्वपूर्ण टिप्स भी दिए। मंच संचालन डॉo आशीष पाठक द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन विज्ञान दिवस समारोह के कॉर्डिनेटर डॉ गजेंद्र सिंह द्वारा किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्थान नवाचार परिषद के सम्मानित सदस्यगण एवं प्रोफ़ेसर (डॉ०) लता कुमार, डॉ गौरी, डॉ लोकेश लोधी, डॉ नितिन चौधरी, डॉ आवेश कुमार आदि का विशेष योगदान रहा।

No comments:
Post a Comment