नित्य संदेश ब्यूरो
रोहटा। डूंगर गांव में दशकों से एक किमी लंबाई की चकरोड को ग्राम प्रधान द्वारा कब्जा मुक्ति की कार्यवाही के बाद पनपे तनाव का रविवार को उस समय पटाक्षेप हो गया, जब विरोध कर रहे किसानो ने अपनी सहमति दे तहसील की टीम द्वारा की गई निशान दही पर पीलर लगा विवाद को निपटा दिया।
बता दे कि डूंगर गांव में तेजवीर, बालेंद्र, सुनील, अनिल, नरेश, देवीसिंह, अशोक, अमित, पप्पू, आनंदपाल आदि का 70 सालों से एक किमी लंबाई की चकरोड पर अवैध कब्जा चला आ रहा था। इसको लेकर दोनों पक्षों के किसानो में दशकों से मुकदमे बाजी भी चली आ रही थी। पूर्व में कई प्रधानों ने इस मार्ग की तहसील टीम से बुलाकर पैमाईश भी कराई लेकिन किसानों के विरोध के चलते कामयाबी नहीं मिल पाई थी। ये चकरोड डूंगर गांव को जटपुरा पुट मुख्य मार्ग से जोड़ती है। इसके पक्का बनने से गांव को जहां एक नए रस्ते की सौगात मिलेगी। वही चर्म शोधन वाले मार्ग को जाने से भी निजात मिलेगी।
ग्राम प्रधान आशा सांगवान ने उक्त रास्ते को कब्जा मुक्त करने के लिए जिला अधिकारी से लिखित शिकायत की थी। तहसील टीम ने पुलिस बल के सहयोग से गांव में आकर पैमाईश करने के बाद निशानदेही की थी। उस समय सभी किसानों ने अपनी सहमति दे दी थी। लेकिन बाद में किसान दो फाड़ हो गए थे। कुछ किसान चकरोड की कब्जा मुक्ति का विरोध करने लगे थे। एक सप्ताह पूर्व चकरोड के समतलीकरण के समय ग्राम प्रधान आशा सांगवान के समर्थकों पर किसान तेजवीर ने पथराव भी कर दिया था। इन किसानों के अवैध कब्जे से एक किमी लंबी ओर चार मीटर चौड़ी विवादित चकरोड पर तहसील की टीम द्वारा की गई निशानदेही के अनुसार रविवार को विश्व हिन्दू महा संघ के विधान सभा अध्यक्ष मांगे शर्मा ने किसानों की सहमति बनाकर पीलर लगाने का कार्य शुरू कराया। ओर ग्राम प्रधान की अगुवाई में 50 पिलर लगा दिए गए है।
ग्राम प्रधान आशा सांगवान ने कहा कि जिन किसानो ने पीलर लगाने के लिए सहमति दे गांव के विकास कार्य जो सहयोग दिया है वह बहुत ही सराहनीय है। इन किसानों का समस्त ग्रामीणों की ओर से धन्यवाद करती हू। किसान अतुल, आनंदपाल, सुनील, देवीसिंह, अशोक, सुभाष, बालेंद्र अश्वनी, अमित आदि सहमति दे पीलर लगाते समय पैमाईश में मौजूद रहे।

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