मेरठ। वेदव्यासपुरी योजना के किसानों ने अपने तीन महीने
से चल रहे धरने को बदनाम करने का आरोप लगाया है। किसानों का कहना है कि कुछ लोग राजनीतिक
लाभ के लिए आंदोलन में घुसपैठ कर रहे हैं और मेडा अधिकारियों से साठगांठ कर इसे समाप्त
करने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों ने स्पष्ट किया कि वे केवल अपनी जायज़ मांगों, विशेषकर
मुआवज़े के लिए धरने पर बैठे हैं और जब तक मुआवज़ा नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा।
किसान नेता मंगत सिंह ने बताया कि वर्ष 2015 में मेडा
अधिकारियों के साथ एक समझौता हुआ था, लेकिन उस पर अमल नहीं किया गया। इसी कारण किसान
मजबूर होकर धरने पर बैठे हैं। मेडा अधिकारियों और किसानों के बीच इस मुद्दे पर कई दौर
की वार्ता हो चुकी है। करीब एक माह पहले राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर भी धरना स्थल पर
पहुंचे थे। उन्होंने किसानों को शासन स्तर पर बात कर मुआवज़ा दिलाने की प्रक्रिया शुरू
कराने का भरोसा दिया था। किसानों का आरोप है कि अब कुछ लोग राजनीतिक लाभ लेने और अधिकारियों
से नज़दीकियां बढ़ाने के लिए आंदोलन की छवि खराब कर रहे हैं। धरने में लोहियानगर, गंगानगर
और वेदव्यासपुरी योजना के साथ ही घाट, कुंडा, डुंगरावली, मलियाना और पुट्ठा गांव के
किसान एकजुट होकर शामिल हैं। किसानों ने कहा कि उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास अस्वीकार्य
है।
शनिवार को वेदव्यासपुरी योजना के किसानों ने राज्यमंत्री
सोमेंद्र तोमर से मुलाकात की और मुआवज़े की प्रक्रिया जल्द शुरू कराने की मांग की।
मंगत सिंह ने बताया कि तीन महीने से लगातार धरने पर बैठे किसानों का सब्र अब जवाब देने
लगा है। इस पर सोमेंद्र तोमर ने किसानों को जल्द समाधान का आश्वासन दिया। इस दौरान
धरने में सतपाल सिंह, रामफल, गंगाराम, जगरूप सिंह, प्रशांत कसाना, ब्रहम सिंह, गजेंद्र
कसाना, गौरव गुर्जर, मुस्तफा, जशवीर प्रधान, बाबी चौधरी सहित बड़ी संख्या में किसान
मौजूद रहे।

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