अर्जुन देशवाल
नित्य संदेश, बहसूमा। श्री राम द्बारा अहंकारी राजा रावण का वध कर दिए जाने पर राम की सेना में खुशियां छा जाती है। उसके बाद नियम के अनुसार राम ने अपना दिया वचन निभाया और विभिषण को लंका का राजकाज सौंप दिया।
राम सीता लक्ष्मण के साथ अयोध्या को चल पड़ते हैं। 14 वर्ष की समय सीमा पूरी होने के बाद जब अयोध्या वासियों को राम के आने की सूचना मिलती है तो सभी अयोध्या के प्रजा वासी खुशी से झूम जाते हैं।उधर सम्पूर्ण अयोध्या नगरी को दुल्हन की तरह सजाया जाता है।राम के अयोध्या पहुंचने पर स्वागत किया जाता है। इसके उपरांत भरत लाल जो सिंहासन पर श्री राम की खड़ाऊं रखकर पाठ कर रहे थे।वह आदर सहित सारी प्रजा के सामने पूजा अर्चना के बाद श्रीराम को उनका राज काज सौंप देते हैं। सम्मान सहित राम का राजतिलक किया जाता है।
इसी के बाद 13 दिनों से चली आ रही रामलीला का मंचन शनिवार की रात यहीं पर समाप्त हो गया।और रामायण बंद कर दी गई। रामलीला का मंचन समाप्त होने के बाद कमेटी के अध्यक्ष बिंदर चाहल सहित कमेटी के सदस्यों ने सभी कलाकारों व पत्रकारों को सम्मानित किया। इस दौरान वर्तमान चैयरमेन सचिन कुमार सुकड़ी,सभी सभासद, डॉक्टर पवन कुमार गोयल व गणमान्य लोग मौजूद रहे।
No comments:
Post a Comment