नित्य संदेश।
2 अक्तूबर 2025 विजया दशमी , गांधी जयंती , वैदिक क्षत्रिय वर्ण का सीमोल्लंघन पर्व और परम पूजनीय डाॅ ० केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा रोपित " राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का " एक शतकीय स्थापना दिवस ।
यद्यपि मेरी दृष्टि का व्याप, संघ की विकास यात्रा के विविध कोणीय व्याप की समता नहीं कर सकता, तथापि मैने अपनी 60 - 62 वर्षीय संघायु में जितना , जैसा संघ को जाना समझा है , उन अनुभूतियों को साझा कर रहा हूं। संघ पिता को इस प्रथम शतकीय जन्मदिन पर , मुझ कनिष्ठ तम स्वयंसेवक पुत्र का यह शब्दोपहार सादर समर्पित ।
संघ यात्रा
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शत वर्षों की
सतत साधना ,
केशव माधव
की संरचना ।
तिल तिल
चलती रही निरंतर ,
हिन्दु राष्ट्र की
सुदृढ सर्जना ।
इस पथ पर
अगणित बलिदानी ,
राष्ट्र व्योम में
अस्त हो गए ।
प्रतिरोधी
उत्तप्त प्रभंजन ,
संघ शक्ति से
पस्त हो गए ।
वन पर्वत
और नगर ग्राम में
रचती , रमती ,
संघ भावना ।
शत वर्षों की ***** 1
रत्नाकर के
दक्षिण तट से
हिमगिरि के
उत्तुंग शिखर तक ।
जगन्नाथ प्रभु के
चरणों से ,
सोमनाथ के
रत्नाकर तक ।
जम्बू द्वीप के
भरत खण्ड में
अनुगुंजित है .
संघ प्रार्थना ।
शत वर्षों की ****** 2
गर्भकाल से
चिता ज्वाल तक ,
जीवन के
क्षण क्षण को थामा ।
व्यक्ति व्यक्ति को
जोड़ , बनाया ,
राष्ट्र देव
मंदिर अभिरामा ।
इस मंदिर की
ईंट ईंट से
मुखरित होती
राष्ट्र वंदना ।
शत वर्षों की ***** 3
यह समाज ,
इस भरत भूमि का ,
भिन्न भिन्न
आस्थाओं वाला ।
भिन्न आकृति ,
भाषा भूषा ,
भिन्न भिन्न
संस्कृतियों वाला ।
हिन्दु मात्र में
जाग उठी है ,
एक उन्मादी
राष्ट्र चेतना ।
शत वर्षों की ***** 4
बहुत सहा ,
अपमान धर्म का ,
सुप्त सिंह ,
हुंकार भर रहा ।
अवध पुरी
मथुरा काशी में
धर्म द्रोह का
दैत्य डर रहा ।
कोटि कोटि मन
अब हर्षित हैं ,
हुई सुपूरित
मनोकामना ।
शत वर्षों की ****** 5
आजीवन
सेवा वृत ले कर ,
निकल पड़े हैं
संघ प्रचारक ,
मोह लोभ के
पाश तोड़ कर ,
चले , राष्ट्र के
ये उद्धारक ।
द्वार द्वार पर
कर पसार कर
देश धर्म की
करें याचना ।
शत वर्षों की। ****** 6
वैभव ,
परम शिखर
पर पहुंचा ।
विश्व गगन में
विजय पताका ।
भगवा ध्वज का
नभ उत्तोलन ,
मान बढाता
भारत मां का ।
विश्व विजय का
लक्ष्य निकट है ।
पस्त पराजित है
प्रवंचना ।
शत वर्षों की ***** 7
मैं
तुच्छ , अकिंचन
स्वयंसेवक
जीवन
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