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Wednesday, September 24, 2025

स्वर्गीय एसपी सिंह के 32 वर्षों की नि:स्वार्थ सेवा को संस्था सदैव याद रखेगी: कप्तान सिंह


 

सूरजमल स्मारक शिक्षा संस्थान द्वारा आयोजित हुई स्व. एसपी सिंह स्मृति व्याख्यान माला (छठी श्रंखला)

 नित्य संदेश ब्यूरो

नई दिल्ली। सूरजमल स्मारक शिक्षा संस्था ने पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय एसपी सिंह की जयंती के उपलक्ष्य में छठी स्मृति व्याख्यान रक्षा एवं रक्षा उत्पादन में इंजीनियर्स की भूमिका-अगले दो दशकों में आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण विषय का आयोजन किया। ले. जनरल विश्वम्भर सिंह (रिटा.) को मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया। 

सूरजमल स्मारक शिक्षा संस्थान केके अध्यक्ष कप्तान सिंह, संरक्षक ब्रहमपाल सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष ईशा जाखड़, सचिव अजीत सिंह चैधरी, कोषाध्यक्ष राजपाल सिंह सोलंकी, एसएस. सोलंकी (संयुक्त सचिव), शिवराम तेवतिया (संयुक्त सचिव), आयोजन समिति के अध्यक्ष इन्द्रजीत सिंह शौकीन, प्रो. प्रेमव्रत सिंह, शकुन्तला देवी धर्मपत्नी एसपी सिंह, संस्था कार्यकारिणी के सदस्यों व अन्य गणमान्य सदस्यों की उपस्थिति रही। सर्वप्रथम कुछ महत्वपूर्ण झलकियों के माध्यम से स्वर्गीय एसपी सिंह के व्यक्तित्व को दर्शाया गया। कार्यक्रम की शुरूआत सभागार में मुख्य अतिथि एवं गणमान्य सदस्यों द्वारा दीप प्रज्ववलन के साथ की गई, तत्पश्चात् अतिथियों एवं सदस्यों द्वारा स्वर्गीय एसपी सिंह को श्रृद्धा सुमन अर्पित किए गए।

संस्था अध्यक्ष कप्तान सिंह ने मुख्य अतिथि व वक्ता के रूप में ले. जनरल विश्वम्भर सिंह का स्वागत करते हुए आज के महत्वपूर्ण विषय की प्रशंसा की। अपने संबोधन में संस्थाध्यक्ष ने स्वर्गीय एसपी सिंह के साथ बिताए पलों को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने 32 वर्षो तक संस्था की निःस्वार्थ सेवा की। उनके द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों व शिक्षण संस्थाओं के लिए किए गए कार्य एक मिसाल है। अपने वचन और कर्म से समय की रेत पर अमिट छाप छोड़ी। पूर्व प्रबन्धक की कार्यशैली क्षमता, उनके आदर्श, उनका नेतृत्व संस्था को सर्वोच्च स्तर पर पहुँचाने मे सराहनीय है। वर्तमान में संस्था प्रगति की ओर अग्रसर है, संस्था को राष्ट्रीय व अंर्तराष्ट्रीय पुरस्कार मिल रहे है। संस्था को मजबूत करने में आपका सहयोग व मार्गदर्शन हमें मिला है। कप्तान सिंह ने संक्षेप में संस्था की उपलब्धियों का वर्णन भी किया। 

ले. जनरल विश्वम्भर सिंह ने कहा कि मै हमारे देश की भावी सुरक्षा और प्रगति के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण विषय पर बोलना चाहूंगा - रक्षा और रक्षा निर्माण में इंजीनियरिंग की भूमिका और आने वाले दशकों में आत्मनिर्भरता के लिए यह भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। 21वीं सदी मै, युद्ध का स्वरूप तेजी से विकसित हो रहा है। पारंपरिक संघर्षो के साथ साइबर युद्ध, अंतरिक्ष सुरक्षा, ड्रोन तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स और इलेक्ट्रोनिक युद्ध भी जुड़ रहे हैं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए, भारत को केवल विदेशी आपूर्तिकत्ताओं पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपना स्वयं का मजबूत रक्षा निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना होगा।

इंजीनियर इस परिवर्तन की रीढ़ है। वे स्वेदशी लड़ाकू विमान, पनडुब्बी, मिसाइल, टैंक और रक्षा प्रणालियाँ डिजाइन करते हैं। एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, संचार और साइबर सुरक्षा में नवाचार करते है। आधुनिक खतरों का मुकाबला करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विश्लेषण, रोबोटिक्स और मानवरहित प्रणालियों में नए समाधान तैयार करते है। भारत का आत्मनिर्भर भारत का दृष्टिकोण रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता पर प्रकाश डालता है। इंजीनियर निम्नलिखित के लिए महत्वपूर्ण है - स्वेदशी तकनीकों का विकास करके आयात पर निर्भरता कम करना, उद्योगों, स्टार्टअप्स और रक्षा अनुसंधान प्रयोगशालाओं के साथ सहयोग करना और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी रक्षा निर्यात सुनिश्चित करना है। 

श्री सिंह ने बताया कि आने वाले दशकों में भारत एक प्रमुख रक्षा शक्ति के रूप में उभरेगा यदि युवा इंजीनियर रक्षा अनुसंधान एवं विकास में सक्रिय रूप से योगदान दें, शिक्षा जगत, उद्योग और रक्षा प्रतिष्ठान तालमेल से काम करें, स्थायित्व और उन्नत सामग्रियों को विनिर्माण में एकीकृत किया जाए, रक्षा गलियारों जैसे नवाचार पारिस्थितिकी तंत्रों को मजबूत किया जाए। अंत में श्री विश्वंभर सिंह ने कहा कि इंजीनियर न केवल मशीनों के निर्माता है, बल्कि संप्रभुता के सरंक्षक भी है। उनकी रचनात्मकता, तकनीकी विशेषज्ञता और प्रतिबद्धता यह निर्धारित करेगी कि भारत अगले बीस वर्षो में रक्षा क्षेत्र में मजबूत और बना रहेगा या नहीं। 

 सचिव चौधरी अजीत सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव में सभी का आभार व्यक्त किया और कहा कि स्व. एस.पी. सिंह जी का इस संस्था को बनाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ईमानदारी व अच्छे नेतृत्व कौशल से उन्होंने संस्था की सेवा की, उन महान व्यक्तित्व को नमन। उनके बताएं रास्ते व मार्गदर्शन पर हम आगे बढ़ते रहे है।

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