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Thursday, August 28, 2025

अहमद शनास की शायरी में मानवीय सांस्कृतिक मूल्य स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं: प्रोफ़ेसर कुद्दूस जावेद



सीसीएस विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में "अहमद शनास : विचारों और कला का रोशन चिराग़" विषय पर ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित

नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध शायरों में अहमद शनास का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनकी शायरी की विशेषताओं को चंद वाक्यों में बयां नहीं किया जा सकता। इस्लाम के बारे में अहमद शनास के विचारों और सोच पर उनका नज़रिया बेहद महत्वपूर्ण है। अहमद शनास की ग़ज़लों में जगह-जगह चाँद, गुलाब और खुशबू का ज़िक्र मिलता है। उनकी शायरी जीवन को ऊर्जा देती है। ये शब्द प्रसिद्ध आलोचक प्रोफेसर कुद्दूस जावेद के थे, जो उर्दू विभाग और इंटरनेशनल यंग उर्दू स्टार्स एसोसिएशन (आयुसा) द्वारा आयोजित "अहमद शनास: विचारों और कला का रोशन चिराग़" विषय पर अपना वक्तव्य दे रहे थे। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर सगीर अफ़्राहीम ने की। प्रसिद्ध कवि अहमद शनास मुख्य अतिथि थे और प्रोफेसर कुद्दूस जावेद [प्रसिद्ध कथा आलोचक] ने विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया। "तहरीके अदब" के संपादक डॉ. जावेद अनवर ने शोधवक्ता के रूप में भाग लिया। डॉ. इरशाद सियानवी ने स्वागत और इरफान आरिफ [जम्मू] ने संचालन किया। इस अवसर पर प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्य के क्षेत्र में हम एक लंबा सफर तय कर चुके हैं। इस मंच का उद्देश्य उन युवाओं की मदद करना है जो साहित्य में शोध और आलोचना के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। इसका उद्देश्य उनके रास्ते में आने वाली समस्याओं का समाधान खोजना है। कार्यक्रम में डॉ. आसिफ अली, डॉ. अलका वशिष्ठ, मुहम्मद शमशाद, मुहम्मद ईसा राणा और अन्य छात्र जुड़े थे।

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