नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। विद्युत कर्मचारी
संयुक्त संघर्ष समिति ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण
निगम के निजीकरण हेतु ट्रांजैक्शन कंसलटेंट नियुक्त करने के लिए टेक्निकल बीड खोले
जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। बिजली कर्मियों के विरोध के चलते टेक्निकल बीड नहीं
खोली जा सकी। बीड खोलने की तारीख 15 मार्च तक बढ़ाई गई है। संघर्ष समिति के आह्वान
पर प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
मीडिया प्रवक्ता ने बताया
कि सोमवार सुबह से ही सभी कार्यालयों के बिजली कर्मचारी और अभियंता शक्ति भवन पहुंचने
लगे और बीड खोलने के निर्धारित समय से पहले शक्ति भवन को घेर लिया। राजधानी लखनऊ के
अलावा प्रदेश के समस्त जनपदों और परियोजना मुख्यालयों पर भी आक्रोशित बिजली कर्मचारियों
ने भोजन अवकाश के दौरान जोरदार विरोध प्रदर्शन किए। संघर्ष समिति के मेरठ पदाधिकारियों
इं सी पी सिंह (सेवानिवृत), इं कृष्ण कुमार साराश्वत, इं निखिल कुमार, इं निशान्त त्यागी,
इं प्रगति राजपूत, अभिमन्यु कुमार, कपिल देव गौतम, जितेन्द्र कुमार, दीपक कश्यप, प्रदीप
दरोगा आदि ने कहा कि बिजली का निजीकरण जिस प्रकार से किया जा रहा है, वह प्रक्रिया
पूरी तरह से गैरकानूनी है। निजीकरण हेतु ट्रांजैक्शन कंसलटेंट नियुक्त करने की निविदा
में कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट (हितों के टकराव) के प्राविधान को हटा दिया गया है। यह सीबीसी
की गाइडलाइंस का उल्लंघन है। ऐसा करने से यह आभास मिल रहा है कि निजीकरण के पीछे कोई
जनहित नहीं है, बल्कि बहुत बड़ा घोटाला होने वाला है।
संघर्ष समिति ने ऐलान किया
है कि 15 मार्च को प्रदेश के समस्त जनपदों परियोजना मुख्यालयों और राजधानी लखनऊ में
और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। निजीकरण के विरोध में समस्त जनपदों और
परियोजनाओं पर विरोध के कार्यक्रम जारी रहेंगे। साथ ही जन प्रतिनिधियों को ज्ञापन दो
अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत बिजलीकर्मी समस्त जनपदों में सांसदों और विधायकों को
निजीकरण के विरोध में ज्ञापन देंगे। ऊर्जा भवन में विद्युत जानपद मण्डल प्रांगण में
भोजनावकाश के समय हुई विरोध सभा में बड़ी संख्या में बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के
विरुद्ध विरोध प्रदर्शन किया।
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