नित्य संदेश, मुजफ्फरनगर। शायर-ए-मशरिक़ अल्लामा डॉक्टर मोहम्मद इक़बाल के यौम-ए-पैदाइश और विश्व उर्दू दिवस के मौके पर शहर मुज़फ़्फ़रनगर की मशहूर शाह इस्लामिक अकैडमी के हॉल में फ़रोग़ उर्दू सेंटर के तहत एक शानदार कार्यक्रम ‘फ़रोग़ उर्दू कांफ्रेंस’ के नाम से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आग़ाज़ मुफ्ती अब्दुल सत्तार इमाम मस्जिद मुस्तफ़ा ने नात-ए-रसूल ﷺ से किया।
कांफ्रेंस की सदारत कारी मोहम्मद खालिद बशीर क़ासमी, बानी अकैडमी ने की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि अल्लामा इक़बाल जैसी अज़ीम शख्सियत सदियों में जन्म लेती है, और जरूरत है कि नई पीढ़ी उनके फ़लसफ़ा-ए-हयात का सही इल्म और समझ हासिल करे। कांफ्रेंस में उस्ताद-ए-शुअरा जनाब अब्दुल हक़ सेहर और मुअल्लिम-ए-शुअरा जनाब डॉक्टर तनवीर गोहर, संपादक तन्वीर अदब ने अपने बेहतरीन कलाम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया और सराहना प्राप्त की।
वहीं मशहूर आलिम-ए-दीन और इकबालियत पर गहरी पकड़ रखने वाले मौलाना मोहम्मद जमशेद कासमी ने अल्लामा इकबाल पर एक गहन व्याख्यान प्रस्तुत किया जो एक बेहतरीन शोध सामग्री पर आधारित था। इसी तरह इलाके के अनुभवी उर्दू प्रकाशक मौलाना हुसैन अहमद कासमी ने उर्दू भाषा और साहित्य के संबंध में अपने बेहतरीन विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उर्दू न केवल शायरी का जरिया है बल्कि सभ्यता और संस्कृति का सम्पूर्ण पाठ्यक्रम है।
कांफ्रेंस में मास्टर शहजाद, मास्टर मेहरबान, गुल बहार मलिक एडवोकेट आदि ने भी अपने विचारों के माध्यम से अल्लामा इकबाल को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का संचालन लोकप्रिय समाजसेवी महबूब आलम एडवोकेट ने बखूबी अंजाम दिया। श्रोताओं में नौशाद कुरैशी सभासद, कारी शौकत अली, मास्टर अख्तर खान, नवाब दिलशाद इलाही, फज़ल अहमद, अब्दुल्ला कुरैशी आदि शामिल हुए।
कांफ्रेंस में उर्दू भाषा और साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान देने पर शुअरा-ए-कराम, उर्दू शिक्षकों, प्रकाशकों और उर्दू पत्रकारों को रिदा-ए-उर्दू शॉल पहनाकर सम्मानित किया गया और मेहमानों को ‘मुहब्ब-ए-उर्दू’ सर्टिफिकेट भी दिया गया। इस अवसर पर ताहसीन अली असरवी, गुलफाम अहमद, मास्टर शहजाद, मौलाना हुसैन साहब और वसीम अहमद साहब ने भी अपने विचार रखे।
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