मोहम्मद इमरान
नित्य संदेश, किठौर। शिक्षा मानवता सिखाती है, मनुष्य चाहे स्त्री हो या पुरुष, शिक्षा को हासिल करना चाहिए। शिक्षा जिस तरह पुरुष के लिए जरूरी है, इस तरह औरतों के लिए भी अनिवार्य है। सबसे पहले जरूरी हमारी देनी तालीम है, लेकिन इसके बाद आधुनिक शिक्षा भी जरूरी है। यह विचार उत्तरी भारत के प्राचीन दिनी संस्था जामिया इस्लामिया अरबिया गुलजार हुसैनिया अजराड़ा के 105वे वार्षिक इजलास की महिला बैठक को संबोधित करते हुए जामिया के मोहतमिम मौलाना हकीम मोहम्मदअब्दुल्ला मुगैसी ने अपनी दुआ तथा संबोधन में व्यक्त किए।
उन्होंने बताया कि अब से 70 साल पहले इमाम भी नाजरा ही पड़े होते थे, जहां लड़कियों को कायदा सिपारा तथा उर्दू कुरान पढ़कर घर बैठा लिया जाता था, लेकिन अब यह आलीमा फाजिला हो रही है, बुखारी शरीफ पढ़ा रही हैं और स्कूल कॉलेज में पड़कर ऊंचे पदों पर देश और समाज सेवा कर रही हैं। मौलाना मुगैसी ने बताया कि सबसे अधिक इलम हजरत आयशा के पास था, अतः इल्म हासिल करना लड़कियों पर भी फर्ज है और लड़कों पर भी। मोहतमिम जामिया ने महिलाओं के जलसे पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि महिलाएं इसमें बढ़-चढकर सम्मिलित हो रही हैं। अपने दीन और ईमान की सुरक्षा के लिए अपनी आखिरत के लिए सहयोग कर रही हैं। यह सहयोग उनका अपना सहयोग है। अजराडा का संदेश दूर-दूर तक जाता है। अब यहां की तरह गांव में जलसे होने लगे हैं और उम्मत को लाभ मिल रहा है। इससे पूर्व जामिया की छात्राओं और शिक्षिकाओं ने हम्द नात, नज़्मो से समां बांध दिया। आई हुई मेहमानों ने दीनी तालीम तबलीग समाज सुधार पर तकरीर पेश की।
हज़्ज़न निखत खानम और आलिमा मोअल्लिमा शहरीन ने पर्दे की अहमियत बताई। बालिकाओं की इस्लामी तरबीयत, महिलाओं की फिजूल खर्ची, परिवार में पति-पत्नी की जिम्मेदारी इत्यादि पर विस्तार से संबोधन किया।
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