नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। प्रदेश में संस्कृत विद्यालयों/महाविद्यालयों में अध्ययन करने वाले छात्र/छात्राओं को संस्कृत छात्रवृत्ति योजना का शुभारम्भ मुख्यमंत्री द्वारा सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी परिसर से सीधा प्रसारण किया गया।
इस योजनान्तर्गत जनपद मेरठ के तीन संस्कृत महाविद्यालय/माध्यमिक विद्यालय में प्रथमा (कक्षा-6,7) के 32, प्रथमा (कक्षा-8) के 16, पूर्व मध्यमा (कक्षा-9, 10) के 58, उत्तर मध्यमा (कक्षा 11, 12) के 67, शास्त्री (स्नातक) के 85 एवं आचार्य (परास्नातक) के 35 कुल 293 छात्र/छात्राएं लाभान्वित होंगे। इन सभी छात्र/छात्राओं के खातों में कोषागार के माध्यम से हस्तान्तरित की जायेगी। जनपद मेरठ में देवनागरी इण्टर कालिज में उक्त कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अरूण चन्द्र प्रकाश गोविल (सांसद मेरठ हापुड़ लोकसभा क्षेत्र), विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीचन्द शर्मा (शिक्षक विधान परिषद सदस्य) उपस्थित हुए। कार्यक्रम का शुभारम्भ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया गया। इसके उपरान्त सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सम्बोधित कार्यक्रम का सजीव प्रसारण कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, विद्यालय के छात्र/छात्राओं कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों एवं सभी अधिकारियों द्वारा देखा गया।
मुख्य अतिथि अरुण चन्द्रप्रकाश गोविल (सांसद) द्वारा अपने संवाद में कहा गया कि मुख्यमंत्री द्वारा संस्कृत विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र/छात्राओं को आर्थिक सहायता पहुँचाने की दृष्टि से छात्रवृत्ति योजना 2024 लागू की है। इस योजना से एक ओर छात्र/छात्राओं को इसका लाभ प्राप्त होगा, बल्कि समाज में संस्कृत पढ़ने की इच्छा रखने वाले छात्र/छात्रायें भी संस्कृत शिक्षा में रुचि लेंगे। उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा हमारे देश की विरासत है तथा हमारी संस्कृति को समझने तथा पूर्ण ज्ञान प्राप्त करने हेतु संस्कृत की जानकारी होना आवश्यक है। मुख्य अतिथि द्वारा इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित सभी शिक्षकों छात्र/छात्राओं को बधाई सन्देश भी दिया।
श्रीचन्द शर्मा (सदस्य विधान परिषद) द्वारा इस अवसर पर अपने संवाद के माध्यम से अवगत कराया गया कि संस्कृत का इतिहास प्राचीन है, संस्कृत में लिखे उपनिदेशों, वेदों आदि के माध्यम से ज्ञान के कारण विश्व में भारत का स्थान ऊंचा रहा है। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा के माध्यम से ही हम प्राचीनकालीन भारत के इतिहास का पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे तथा समाज को ही नहीं अपितु पूरे देश को अपनी संस्कृति का ज्ञान दे सकेंगे।
कार्यक्रम में अम्बरीश कुमार (जिला विकास अधिकारी), सुनील कुमार (परियोजना निदेशक डीआरडीए), राजेश कुमार (जिला विद्यालय निरीक्षक), डी०एन० इण्टर कालिज के प्रबन्ध समिति सदस्य, श्री बिल्लेश्वर संस्कृत महाविद्यालय सदर, धर्मदास जैन देवनागरी संस्कृत विद्यालय कम्बोह गेट तथा श्रीमद्दयानन्द उत्कर्ष आर्य कन्या गुरुकुल नारंगपुर परीक्षितगढ़ के शिक्षकगण तथा छात्र/छात्रायें उपस्थित रहे।
No comments:
Post a Comment