नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। हिंदी दिवस के अवसर पर कवि विजय प्रेमी ने कहा, हिंदी के लिए बस हमें यही प्रयास करना है कि हम अपने बच्चों के साथ अधिक से अधिक हिंदी भाषा में बात करने का प्रयास करें, क्योंकि भारतीय जन मानस की आत्म चेतना का नाम हिंदी भाषा है, जो अंत्योदय के माध्यम से जीवन को सुसज्जित करती है,
विश्व में एक हिंदी भाषा ही ऐसी है, जिसमें एक एक शब्द का सटीक चित्रण हमारे सम्मुख होता है अर्थात यह वो भाषा है जिसमें कहीं भी किंचित मात्र भी त्रुटी नही है कभी कहीं कोई समझौता नहीं करती, व्याकरण की दृष्टि से अमर भाषा है एक्स इसका आत्ममूखी दर्पण अनूठा है। विद्यालयों में अधिक से अधिक हिंदी कविता, हिन्दी निबंध, प्रतियोगिताएं आयोजित हों, जो हिंदी पर अच्छा लिखे समझे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाय, पोस्टरों में हिंदी का प्रयोग होना चाहिए। हमारा संकल्प हो हिंद चेतना को जगाओ हिंदी को जन मानस में जगाओ।
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