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Wednesday, October 7, 2026

वैदिक गणित को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने पर मंथन



चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की विशेष बैठक आयोजित


नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में वैदिक गणित के प्रचार-प्रसार, उच्च शिक्षा में इसके विस्तार तथा इसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से एक विशेष मंथन बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में न्यास के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. ए. विनोद जी ने वैदिक गणित के विभिन्न आयामों पर गहन विचार-विमर्श किया।


बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. ए. विनोद जी ने कहा कि वैदिक गणित भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आवश्यकता इस बात की है कि इसे आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के साथ जोड़ते हुए देश के अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में वैदिक गणित के पाठ्यक्रमों को विशेष रूप से बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। न्यास के क्षेत्रीय संयोजक डॉ. शिवराज सिंह जी ने बताया कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में वैदिक गणित से संबंधित सर्टिफिकेट एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैदिक गणित की उपयोगिता अब उच्च शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के स्तर पर भी दिखाई दे रही है। उन्होंने विश्वविद्यालय में संचालित पाठ्यक्रमों के अनुभवों को अन्य विश्वविद्यालयों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई। विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. मुकेश जी ने वैदिक गणित की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह विद्यार्थियों में गणना कौशल के साथ-साथ तार्किक एवं विश्लेषणात्मक चिंतन विकसित करने का माध्यम बन सकता है। भारतीय ज्ञान परंपरा के इस महत्वपूर्ण पक्ष को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता है। न्यास के मेरठ प्रांत के वैदिक गणित संयोजक डॉ. ब्रह्मपाल जी ने सुझाव दिया कि वैदिक गणित को माँ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय में भी सर्टिफिकेट एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम के रूप में प्रारंभ किया जाना चाहिए, जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिक से अधिक विद्यार्थी इससे लाभान्वित हो सकें। न्यास के क्षेत्रीय संयोजक, प्रबंधन शिक्षा डॉ. वीरेंद्र तिवारी जी ने वैदिक गणित के व्यापक प्रचार-प्रसार पर बल देते हुए कहा कि इसके उपयोग और अध्ययन को विभिन्न शैक्षिक एवं प्रबंधन क्षेत्रों से जोड़ने के प्रयास किए जाने चाहिए।


एस.एस.वी. के प्रोफेसर डॉ. सुबोध कुमार शर्मा जी, जो न्यास के शोध प्रकल्प से भी जुड़े हैं, ने कहा कि प्रत्येक छात्र-छात्रा को वैदिक गणित की मूलभूत जानकारी प्राप्त होनी चाहिए। उन्होंने इसे विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता, गणना कौशल एवं समस्या समाधान की क्षमता के विकास के लिए उपयोगी बताया। मेरठ प्रांत के अध्यक्ष डॉ. अनिल मलिक जी ने वर्तमान समय में वैदिक गणित के प्रयोग तथा इसके भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंध पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए वैदिक गणित महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। बैठक में मेरठ प्रांत के संयोजक डॉ. योगेंद्र सिंह ने भारतीय ज्ञान परंपरा में वैदिक गणित की महत्ता, वर्तमान समय में इसकी आवश्यकता तथा भविष्य में इसकी संभावनाओं पर विस्तृत विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वैदिक गणित को केवल गणना की एक पद्धति के रूप में न देखकर भारतीय ज्ञान परंपरा के व्यापक संदर्भ में समझने की आवश्यकता है। विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में इसके व्यवस्थित अध्ययन, प्रशिक्षण और शोध को बढ़ावा देकर इसे नई पीढ़ी से जोड़ा जा सकता है।


बैठक में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से वैदिक गणित के सर्टिफिकेट एवं डिप्लोमा पाठ्यक्रम पूर्ण कर चुके लगभग 20 छात्र-छात्राओं ने भी सहभागिता की। विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए वैदिक गणित की उपयोगिता एवं व्यापकता पर अपने विचार रखे। इसके अतिरिक्त मेरठ प्रांत के विभिन्न पंच शिक्षक केंद्रों पर वैदिक गणित के क्षेत्र में कार्य कर रहे शिक्षकों ने भी बैठक में सहभागिता की और अपने अनुभव एवं सुझाव प्रस्तुत किए। शिक्षकों ने वैदिक गणित के प्रशिक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए विद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में नियमित गतिविधियों को बढ़ाने की आवश्यकता बताई। बैठक में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने वैदिक गणित को भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्वपूर्ण अंग के रूप में आगे बढ़ाने तथा इसे विद्यालयी शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक व्यापक रूप से पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास करने पर बल दिया।

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