नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। भा.कृ.अनु.प.—केन्द्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में आराध्या प्रकाशन द्वारा प्रकाशित वरिष्ठ साहित्यकार डा. ईश्वर चन्द गंभीर द्वारा रचित काव्य-संग्रह ‘आओ करें हिन्दी का वंदन’ का भव्य विमोचन समारोह आयोजित किया गया। हिन्दी भाषा के प्रति समर्पित इस साहित्यिक आयोजन में संस्थान के अधिकारियों, कर्मचारियों, साहित्यप्रेमियों एवं प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम के दौरान हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार एवं उसके महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें हिन्दी निबंध प्रतियोगिता, बच्चों द्वारा कविता-पाठ सहित हिन्दी विषय पर आधारित अनेक प्रतियोगिताएँ प्रमुख रहीं। संस्थान के कर्मचारियों एवं प्रतिभागियों ने इन प्रतियोगिताओं में उत्साह के साथ भाग लेकर हिन्दी के प्रति अपनी रुचि और अनुराग का परिचय दिया। संस्थान के सान्निध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में डा. ईश्वर चन्द गंभीर की हिन्दी विषय पर केंद्रित काव्य-कृति ‘आओ करें हिन्दी का वंदन’ का गरिमापूर्ण विमोचन किया गया। कृति के माध्यम से हिन्दी भाषा की समृद्ध परंपरा, सांस्कृतिक चेतना, साहित्यिक गरिमा और जन-जन से उसके आत्मीय संबंध को स्वर प्रदान किया गया है।
विमोचन समारोह में संस्थान के निदेशक डा.ए.के. मोहंती, डा. उमेश कुमार सिंह तथा अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार डा. ईश्वर चन्द गंभीर एवं वरिष्ठ कवि डा.सुदेश यादव ‘जख्मी’ प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम को साहित्यिक रंग प्रदान करते हुए कवि डा. सुदेश यादव ‘जख्मी’ ने अपनी श्रृंगार रस से ओतप्रोत कविताओं का सुमधुर पाठ किया। उनकी कविताओं ने सभागार में उपस्थित श्रोताओं को प्रेम, सौंदर्य और संवेदना के भावों से सराबोर कर दिया। उनकी प्रस्तुति पर श्रोताओं ने मुक्त कंठ से सराहना की और बार-बार तालियों से उत्साहवर्धन किया। वहीं डा. ईश्वर चन्द गंभीर ने विभिन्न समसामयिक एवं जीवन से जुड़े विषयों पर अपने सशक्त मुक्तक प्रस्तुत कर अपनी साहित्यिक प्रतिभा का परिचय दिया। उनके मुक्तकों ने श्रोताओं को कभी गुदगुदाया तो कभी गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित किया। उनकी प्रभावशाली प्रस्तुति पर सभागार में खूब वाहवाही हुई।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर अतिथि डा. सुदेश यादव ‘जख्मी’ एवं डा. ईश्वर चन्द गंभीर ने संस्थान के निदेशक डा. ए.के. मोहंती एवं डा. उमेश कुमार सिंह के साथ विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं सम्मान प्रदान किए। इस अवसर पर वक्ताओं ने हिन्दी भाषा की विशेषताओं, उसकी वैज्ञानिकता, सरलता, व्यापकता एवं भारतीय संस्कृति में उसके महत्वपूर्ण स्थान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिन्दी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय समाज की सांस्कृतिक चेतना, संवेदना और आत्मीयता को जोड़ने वाली सशक्त भाषा है। आज आवश्यकता है कि हिन्दी को केवल बोलचाल तक सीमित न रखते हुए शिक्षा, साहित्य, विज्ञान, प्रशासन और दैनिक जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सम्मानपूर्वक अपनाया जाए।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने हिन्दी के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प लिया। अंत में सभी अतिथियों ने प्रतिभागियों एवं उपस्थित जनसमुदाय के सुखद, स्वस्थ एवं मंगलमय जीवन की कामना की। कार्यक्रम में डा. रविन्द्र सिंह, सुनील कुमार शर्मा, डा. राहुल कुमार, डा. शंकर कश्यप, डा. नरेश प्रसाद, निशांत सविते, विकाश शर्मा सहित संस्थान के अनेक अधिकारी, कर्मचारी एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
‘आओ करें हिन्दी का वंदन’—हिन्दी के प्रति समर्पित एक साहित्यिक पुकार
डा. ईश्वर चन्द गंभीर की यह काव्य-कृति अपने शीर्षक के अनुरूप हिन्दी के प्रति सम्मान, प्रेम और गौरव की भावना को जन-जन तक पहुँचाने का सार्थक प्रयास है। अराध्या प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह कृति हिन्दी साहित्य के प्रति समर्पित पाठकों के लिए निश्चित रूप से एक उपयोगी एवं पठनीय साहित्यिक उपहार है।
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