प्रो. डॉ. दिनेश सी. शर्मा के ‘वाइब्रोअकूस्टिक ब्रा’ प्रारूप ने खींचा वैश्विक विशेषज्ञों का ध्यान, अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग की संभावनाएं बढ़ीं
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के जंतु विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) दिनेश सी. शर्मा ने हांगकांग में आयोजित 2026 एशिया-प्रशांत स्वस्थ दीर्घायु अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हुए बायो-म्यूजिकोलॉजी एवं संगीत चिकित्सा के क्षेत्र में किए जा रहे शोध को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। 1 से 4 अक्टूबर 2026 तक हांगकांग स्थित होपवेल सम्मेलन केंद्र में आयोजित इस चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्हें विशिष्ट वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था।
एशिया-प्रशांत दीर्घायु चिकित्सा सोसायटी द्वारा आयोजित सम्मेलन में विश्व के विभिन्न देशों से 2,000 से अधिक शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, उद्योग प्रतिनिधियों, नवप्रवर्तकों, निवेशकों तथा स्वास्थ्य-प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने सहभागिता की। सम्मेलन में स्वस्थ दीर्घायु, वृद्धावस्था विज्ञान, डिजिटल स्वास्थ्य, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वास्थ्य एवं कल्याण नवाचार तथा नवीन स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में शोध, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर व्यापक विमर्श हुआ।
ध्वनि, मस्तिष्क और दीर्घायु पर दिया व्याख्यान
सम्मेलन में प्रो. शर्मा ने “ध्वनि, मस्तिष्क एवं दीर्घायु : संगीत चिकित्सा और जैव-संगीत विज्ञान को स्वस्थ वृद्धावस्था के उपायों में रूपांतरित करना” विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। इसके पश्चात आयोजित परिचर्चा में भी उन्होंने सहभागिता की। अपने व्याख्यान में प्रो. शर्मा ने ध्वनि, संगीत एवं लय के मस्तिष्क, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक जुड़ाव तथा स्वस्थ वृद्धावस्था पर संभावित प्रभावों को रेखांकित करते हुए जैव-संगीत विज्ञान को वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित स्वस्थ दीर्घायु संबंधी उपायों से जोड़ने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
‘वाइब्रोअकूस्टिक ब्रा’ प्रारूप बना आकर्षण का केंद्र
सम्मेलन में प्रो. शर्मा द्वारा स्तन कैंसर संबंधी अनुसंधान के लिए विकसित किए जा रहे ‘वाइब्रोअकूस्टिक ब्रा’ (ध्वनि-कंपन आधारित विशेष ब्रा) के प्रारूप ने वैज्ञानिकों, स्वास्थ्य-प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों एवं अन्य प्रतिभागियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। यह नवाचार नियंत्रित ध्वनि एवं कंपन आधारित तकनीक को स्तन स्वास्थ्य तथा कैंसर संबंधी अनुसंधान से जोड़ने की दिशा में विकसित किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसके प्रदर्शन ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में किए जा रहे जैव-संगीत विज्ञान संबंधी अनुसंधान को वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के समक्ष प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।
अमेरिकी संस्था के साथ शोध सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
सम्मेलन के दौरान अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित लेवल 42 एआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. शाशा जुम्बे के साथ संभावित शोध सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। प्रो. शर्मा के अनुसार, जुम्बे ने जंतु विज्ञान विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के साथ समझौता ज्ञापन होने के उपरांत संयुक्त अनुसंधान के लिए लगभग 20,000 अमेरिकी डॉलर मूल्य के ‘वाइब्रोम पल्स यूएनए’ तथा ‘लेनोवो के-11 टैबलेट’ आधारित उपकरण बिना किसी लागत के उपलब्ध कराने पर सहमति व्यक्त की है। प्रस्तावित सहयोग के माध्यम से जैव-संगीत विज्ञान, ध्वनि-कंपन आधारित हस्तक्षेप तथा स्वास्थ्य से संबंधित शारीरिक परिवर्तनों की वैज्ञानिक निगरानी को आधुनिक डिजिटल तकनीक एवं आंकड़ा विश्लेषण से जोड़ने में सहायता मिलने की संभावना है।
कैंसर संबंधी परिचर्चा में ज्योति शर्मा ने रखे विचार
सम्मेलन में ज्योति शर्मा ने भी कैंसर विषयक परिचर्चा में सहभागिता की। उन्होंने विशेष रूप से कीमोथेरेपी एवं रेडियोथेरेपी के बाद रोगियों में वाइब्रोअकूस्टिक ब्रा की संभावित भूमिका तथा इस दिशा में वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर विचार रखे। वैश्विक शोध सहयोग और निवेश की संभावनाएं तलाशना रहा उद्देश्य प्रो. शर्मा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विश्वविद्यालय की सहभागिता का उद्देश्य केवल शोध कार्यों को प्रस्तुत करना नहीं था, बल्कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में विकसित हो रहे जैव-संगीत विज्ञान एवं ध्वनि-कंपन प्रौद्योगिकी संबंधी अनुसंधान को वैश्विक पहचान दिलाना, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों एवं स्वास्थ्य-प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ शोध सहयोग विकसित करना तथा भविष्य में शोध अनुदान और निवेश की संभावनाओं को तलाशना भी था। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में स्वस्थ दीर्घायु, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल स्वास्थ्य, चिकित्सकीय उपयोग में रूपांतरण, स्वास्थ्य एवं कल्याण नवाचार तथा निवेश जैसे विषय प्रमुख रहे।
सीसीएसयू के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग में रुचि
सम्मेलन के दौरान एशिया-प्रशांत दीर्घायु चिकित्सा सोसायटी की ओर से जंतु विज्ञान विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के साथ भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की संभावनाएं तलाशने में रुचि व्यक्त की गई।प्रो. शर्मा ने कहा कि, “इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय मंच विश्वविद्यालय में विकसित शोध एवं नवाचार को विश्व के वैज्ञानिक समुदाय तक पहुंचाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग, अत्याधुनिक तकनीक और शोध वित्तपोषण के नए अवसर उपलब्ध कराते हैं। हमारा प्रयास है कि जैव-संगीत विज्ञान और ध्वनि-कंपन तकनीक को वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर स्वास्थ्य एवं स्वस्थ वृद्धावस्था के क्षेत्र में उपयोगी बनाया जाए।” चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की यह अंतरराष्ट्रीय सहभागिता विश्वविद्यालय में विकसित हो रहे जैव-संगीत विज्ञान संबंधी अनुसंधान को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने तथा स्तन कैंसर से संबंधित ध्वनि-कंपन आधारित तकनीक को अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई है।

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