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Thursday, October 8, 2026

सरदार पटेल सुभारती विधि संस्थान में “कोर्स आउटकम–प्रोग्राम आउटकम राइटिंग, मैपिंग एवं अटेनमेंट कैलकुलेशन” पर वार्षिक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित


नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के सरदार पटेल सुभारती विधि संस्थान में ‘कोर्स आउटकम–प्रोग्राम आउटकम राइटिंग, मैपिंग एवं अटेनमेंट कैलकुलेशन’ विषय पर वार्षिक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन मूट कोर्ट हॉल में किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को आउटकम-बेस्ड एजुकेशन की अवधारणा, सीओ-पीओ मैपिंग, ब्लूम्स टैक्सोनॉमी तथा अटेनमेंट कैलकुलेशन की व्यावहारिक जानकारी प्रदान कर शिक्षण एवं मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना रहा।


कार्यक्रम का आयोजन सुभारती विधि संस्थान के निदेशक जस्टिस राजेश चंद्र (पूर्व न्यायमूर्ति, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, उत्तर प्रदेश) के निर्देशन तथा प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई, संकायाध्यक्ष, सुभारती विधि संस्थान के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यशाला में विधि विभाग के साथ-साथ कला एवं सामाजिक विज्ञान, ललित कला, शिक्षा संकाय तथा बौद्ध अध्ययन विभाग के शिक्षकों ने भी सहभागिता की। कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद मुख्य वक्ता डॉ. प्रदीप कुमार यादव, परीक्षा नियंत्रक, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय ने शिक्षकों को कोर्स आउटकम एवं प्रोग्राम आउटकम के लेखन, उनकी प्रभावी मैपिंग तथा अटेनमेंट की गणना से जुड़ी प्रक्रियाओं की विस्तार से जानकारी दी। डॉ. प्रदीप कुमार यादव ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के लिए प्रत्येक पाठ्यक्रम से अपेक्षित अधिगम परिणामों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करना आवश्यक है। इन कोर्स आउटकम को संबंधित प्रोग्राम आउटकम के साथ प्रभावी ढंग से मैप करने से विद्यार्थियों की सीखने की उपलब्धियों का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित तरीके से आकलन किया जा सकता है। उन्होंने सीओ-पीओ मैपिंग को केवल औपचारिक प्रक्रिया न मानकर शिक्षण की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की वास्तविक उपलब्धि को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। 


कार्यशाला में ब्लूम्स टैक्सोनॉमी पर भी विस्तार से चर्चा हुई। वक्ता ने बताया कि विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को केवल जानकारी प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उनकी समझ, ज्ञान का अनुप्रयोग, विश्लेषण, मूल्यांकन और सृजनात्मक क्षमता के विकास को भी अधिगम परिणामों में शामिल किया जाना चाहिए। इस प्रक्रिया से शिक्षण-अधिगम को अधिक उद्देश्यपूर्ण और परिणाम केंद्रित बनाया जा सकता है। प्रशिक्षण सत्र को संवादात्मक एवं व्यावहारिक बनाने के लिए शिक्षकों को विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से सीओ-पीओ मैपिंग और अटेनमेंट कैलकुलेशन की प्रक्रिया समझाई गई। इस दौरान डॉ. अफरीन अलमास एवं आशुतोष देशवाल ने विभिन्न व्यावहारिक एवं अकादमिक प्रश्न पूछे, जिनका मुख्य वक्ता ने विस्तार पूर्वक समाधान किया।


समापन अवसर पर प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई, संकायाध्यक्ष, सुभारती विधि संस्थान ने मुख्य वक्ता एवं सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सीओ-पीओ आधारित शिक्षण एवं मूल्यांकन प्रणाली उच्च शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण और आउटकम-बेस्ड एजुकेशन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने शिक्षकों से प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को अपने-अपने शिक्षण एवं मूल्यांकन कार्य में प्रभावी रूप से लागू करने का आह्वान किया।कार्यशाला में प्रो. (डॉ.) प्रेम चंद्र, डॉ. सारिका त्यागी, डॉ. अफरीन अलमास, डॉ. अंजुम जहां, सोनल जैन, सहित अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे।

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