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Sunday, September 13, 2026

प्रसिद्ध उर्दू पत्रकार एवं समाजसेवी लियाकतुल्ला खान शेरवानी को पेश की गई श्रद्धांजलि



मिल्लत चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से सामाजिक सेवाओं, बालिका शिक्षा, कुरआन की तालीम और मेडिकल कैंपों, राष्ट्रीयता सहित जनकल्याण के कार्यों को किया गया याद


अनम शेरवानी

नित्य संदेश, बागपत। प्रसिद्ध उर्दू पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए जीवनभर कार्य करने वाले स्वर्गीय लियाकतुल्ला खान शेरवानी की 8वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस मौके पर उनकी पत्रकारिता, शिक्षा, धार्मिक जागरूकता, राष्ट्रीयता और सामाजिक सेवाओं को विशेष रूप से याद किया गया।


लियाकतुल्ला खान शेरवानी ने मिल्लत चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से गरीब, जरूरतमंद और कमजोर वर्गों की सहायता के लिए अनेक सामाजिक एवं जनकल्याणकारी कार्य किए। उन्होंने ने जरूरतमंद लोगों की मदद, गरीब क्षेत्रों में मेडिकल कैंप तथा अन्य जनसेवा के कार्य आयोजित किए गए। उनका उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाना और इंसानियत की सेवा करना था। उन्होंने बागपत में लड़कियों की शिक्षा के लिए ‘जामिया-तुल-मोमिनात’ के नाम से स्कूल स्थापित कर बच्चियों को शिक्षा से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल की। उनका मानना था कि किसी भी समाज की तरक्की के लिए बेटियों की शिक्षा बेहद जरूरी है। कुरआन की शिक्षा को आम करने के लिए उन्होंने ‘दावतुल कुरआन मिशन’ नाम से संस्था की स्थापना की। इसके माध्यम से लोगों को कुरआन मजीद को अनुवाद के साथ पढ़ने और समझने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने छोटी-छोटी सूरतों को अनुवाद सहित लोगों तक पहुंचाने का भी कार्य किया, ताकि आम लोग कुरआन के संदेश को आसानी से समझ सकें।


उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए उन्होंने ‘ऑल इंडिया उर्दू तंजीम’ की स्थापना की और उर्दू की शमा को रोशन रखने के लिए लगातार संघर्ष किया। अपने उर्दू मासिक ‘अल-मुनीर’ के माध्यम से उन्होंने उर्दू पत्रकारिता में महत्वपूर्ण स्थान बनाया और सामाजिक एवं कौमी मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया। खानकाह बिलाली के पीर सैयद मौलाना बिलाल हुसैन थानवी ने कहा कि लियाकतुल्ला खान शेरवानी का पूरा जीवन इंसानियत की सेवा और समाज की बेहतरी के लिए समर्पित रहा। उन्होंने शिक्षा, धार्मिक जागरूकता, पत्रकारिता और सामाजिक सेवा के माध्यम से लोगों की भलाई के लिए काम किया।


शहर काजी कारी हबीबुर्रहमान ने कहा कि लियाकतुल्ला खान शेरवानी उर्दू पत्रकारिता की एक महत्वपूर्ण शख्सियत थे। ‘अल-मुनीर’ के माध्यम से उन्होंने उर्दू पत्रकारिता को बढ़ावा दिया। बच्चियों की शिक्षा और उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए उनकी सेवाओं को हमेशा याद किया जाएगा। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिला महासचिव हाफिज मोहम्मद कासिम सिद्दीकी ने कहा कि लियाकतुल्ला खान शेरवानी का जीवन सेवा-ए-खल्क की बेहतरीन मिसाल था। उन्होंने मिल्लत चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से गरीबों और जरूरतमंदों की मदद की तथा मेडिकल कैंपों के जरिए जरूरतमंद लोगों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने का काम किया।


जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिला अध्यक्ष मौलाना यामीन ने कहा कि दावतुल कुरआन मिशन के माध्यम से उन्होंने कुरआन की शिक्षा को आम करने और लोगों को कुरआन को अनुवाद के साथ पढ़ने के लिए प्रेरित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनकी यह कोशिश धार्मिक जागरूकता के लिहाज से सराहनीय थी। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के उपाध्यक्ष मुफ्ती शाह आलम ने कहा कि उर्दू के प्रचार-प्रसार के लिए लियाकतुल्ला खान शेरवानी ने ऑल इंडिया उर्दू तंजीम के माध्यम से उल्लेखनीय सेवाएं दीं। उन्होंने उर्दू की शमा को रोशन रखने और नई पीढ़ी को उर्दू भाषा से जोड़ने के लिए लगातार मेहनत की।


उलेमा और उनके शुभचिंतकों ने कहा कि लियाकतुल्ला खान शेरवानी ने पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज की बेहतरी और आम जनता की आवाज बनने का माध्यम बनाया। मिल्लत चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से सामाजिक सेवा, जामिया-तुल-मोमिनात के माध्यम से बालिका शिक्षा, दावतुल कुरआन मिशन के जरिए कुरआन की शिक्षा, मेडिकल कैंपों तथा ऑल इंडिया उर्दू तंजीम के माध्यम से उर्दू के प्रचार-प्रसार के लिए किए गए उनके कार्य हमेशा याद रखे जाएंगे। इस अवसर पर स्वर्गीय लियाकतुल्ला खान शेरवानी के लिए दुआ-ए-मगफिरत की गई और उनकी पत्रकारिता, राष्ट्रीयता एवं सामाजिक सेवाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

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