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Tuesday, September 22, 2026

मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या रोकथाम विषय पर जागरूक कार्यक्रम



नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या रोकथाम विषय पर "सेंटर फॉर स्टूडेंट्स  मेंटल हेल्थ एंड सूइसाइड प्रिवेंशन, मनोविज्ञान विभाग एवं मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया, मेरठ के संयुक्त तत्वाधान में एक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना तथा मानसिक संकट के संकेतों को समझने और समय रहते उचित सहायता प्राप्त करने के प्रति जागरूक करना था।


कार्यशाला में मुख्य वक्ता एम०एच०एम० इंडिया की परामर्श मनोवैज्ञानिक सुश्री प्रिया पॉल रहीं, जिन्होंने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कठिनाइयों तथा संकट की परिस्थितियों में सहायता प्राप्त करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय हमें समय रहते उचित सहायता एवं पेशेवर परामर्श लेना आवश्यक होता है। उन्होंने कहा कि एक विद्यार्थियों में आज पियर प्रेशर, परिवार एवं समाज की अपेक्षाएं, सोशल मीडिया माध्यमों से बढ़ते कंपटीशन, मोबाइल के अत्यधिक उपयोग एवं ज्यादा ऑनलाइन गेम खेलने की बहक से तनाव बढ़ रहा है। और मोबाइल के जमाने में कोई भी व्यक्ति अपनी मानसिक पीड़ा एवं तनाव को किसी अन्य व्यक्ति से साझा करने में झिझकता है परिणाम स्वरूप ऐसे लोग या तो किसी मानसिक विकार का शिकार होते हैं अथवा समय रहते यदि वे किसी मनोवैज्ञानिक से उपचार नहीं कराते हैं तो वे पहले डिप्रेशन उसके उपरांत सुसाइडल थॉट एवं सुसाइड तक का प्रयास करने लगा सकते हैं। 


इसलिए यदि हमारे आसपास कोई ऐसा विद्यार्थी है जो बार-बार अपनी जिंदगी को खत्म करने की धमकी देता है या "हमारे रहने के बाद बाकी सब लोग खुश रहेंगे" ऐसा बार-बार बोलता है, अथवा "मेरी जिंदगी का इस दुनिया में कोई उपयोग ही नहीं है" आदि वक्तव्य बार-बार देकर परिवारजनों एवं दोस्तों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करता है तो ऐसे में हमें चुप नहीं बैठना है और समझना है कि ऐसे लोग खतरे में है और उन्हें सहायता की जरूरत है। ऐसी स्थिति में हमें शीघ्र ही अपने शिक्षकों या चीफ वार्डन या किसी प्रशासनिक अधिकारी को बताना चाहिए अथवा मनोविज्ञान विभाग स्थित स्टूडेंट सेंटर फॉर मेंटल हेल्थ एंड वेल बीइंग में जाकर परामर्श लेना चाहिए अथवा यदि कोई खुद नहीं जाना चाहता तो मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया के नंबर 8899 333 777 पर भी अपना नाम पता बताए बिना भी निशुल्क सहायता ले सकता है। उन्होंने कहा कि हम यदि जागरूक हैं तो हम स्वयं की ही नहीं बल्कि कई लोगों की जिंदगी को बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की स्थिति में सहायता लेना एक ताकत है ना की कमजोरी और हमें इससे पीछे नहीं बढ़ना चाहिए। 


कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को मानसिक संकट के संभावित संकेतों को पहचानने, संवेदनशीलता के साथ संवाद करने तथा आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता और रेफरल की दिशा में कदम उठाने के बारे में जागरूक किया गया। प्रतिभागियों ने विषय से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे और सक्रिय रूप से सहभागिता की। कार्यशाला का संचालन एवं फेसिलिटेशन श्री सागर तोमर द्वारा किया गया। उन्होंने सत्र को व्यवस्थित रूप से संचालित करते हुए प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की। इस दौरान उर्दू विभाग के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करना, समय पर सहायता प्राप्त करना और जरूरतमंद व्यक्ति तक उचित सहयोग पहुँचाना आत्महत्या रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

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