नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के सरदार पटेल सुभारती विधि संस्थान में एलुमनाई कमेटी एवं मूट कोर्ट एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में ‘मूट प्रीपोजिशन से कोर्टरूम तक: शोध एवं मेमोरियल लेखन कौशल’ विषय पर हैंड्स-ऑन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विधि विद्यार्थियों को कानूनी शोध, तथ्यों के विश्लेषण, प्रभावी तर्क निर्माण तथा मेमोरियल लेखन की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।
कार्यशाला का आयोजन सुभारती लॉ कॉलेज के निदेशक जस्टिस राजेश चंद्रा (पूर्व न्यायमूर्ति, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश) के दिशा-निर्देशन तथा प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई, कार्यकारी संकायाध्यक्षा, सरदार पटेल सुभारती विधि संस्थान के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम में अधिवक्ता भाविनी कौशल्या ने विद्यार्थियों को मूट कोर्ट की तैयारी से लेकर न्यायालय में प्रभावी प्रस्तुति तक की बारीकियों से अवगत कराया। अधिवक्ता भाविनी कौशल्या सरदार पटेल सुभारती विधि संस्थान की वर्ष 2018 बैच की बीए एलएलबी पूर्व छात्रा एवं स्वर्ण पदक विजेता हैं तथा वर्तमान में दिल्ली उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न मूट कोर्ट प्रतियोगिताओं में विजेता एवं सर्वश्रेष्ठ वक्ता सहित अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्हें चार बार सर्वश्रेष्ठ टीम पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है। इसके अलावा संस्थान की आंतरिक मूट कोर्ट प्रतियोगिता में भी उन्होंने सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार प्राप्त किया है।
कार्यशाला के दौरान अधिवक्ता भाविनी कौशल्या ने भगवानदास गोवर्धनदास केडिया बनाम मेसर्स गिरधारीलाल परशोत्तमदास एंड कंपनी के महत्वपूर्ण निर्णय के माध्यम से विद्यार्थियों को मूट प्रीपोजिशन में दिए गए तथ्यों को व्यवस्थित ढंग से समझने और उनमें से महत्वपूर्ण कानूनी बिंदुओं की पहचान करने की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने विशेष रूप से क्षेत्राधिकार की पहचान तथा न्यायालय के समक्ष उसके प्रभावी प्रतिपादन के तरीके बताए। कार्यशाला में न्यायालयीन शिष्टाचार एवं न्यायालयीन प्रक्रिया पर भी विशेष चर्चा हुई। विद्यार्थियों को न्यायाधीशों के समक्ष प्रस्तुत होने की उचित प्रक्रिया, न्यायालय की गरिमा बनाए रखने, न्यायाधीशों को संबोधित करने की औपचारिक प्रक्रिया तथा अपनी बात प्रभावी एवं मर्यादित तरीके से रखने के महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई।
आयोजन समिति ने संस्थान के निदेशक एवं पूर्व न्यायमूर्ति, इलाहाबाद उच्च न्यायालय जस्टिस राजेश चंद्रा के निरंतर मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त किया। उनके मार्गदर्शन को विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक एवं अभ्यास आधारित विधि शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण बताया गया। साथ ही, प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई, कार्यकारी संकायाध्यक्षा के निरंतर सहयोग, प्रोत्साहन एवं मार्गदर्शन के लिए भी आभार व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम के अंत में अनुराग चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने अतिथि वक्ता अधिवक्ता भाविनी कौशल्या के बहुमूल्य समय, मार्गदर्शन एवं व्यावहारिक विधिक ज्ञान साझा करने के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही कार्यशाला में सक्रिय सहभागिता करने वाले सभी विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद किया गया।

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