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Tuesday, September 8, 2026

लम्हों ने ख़ता की थी, सदियों ने सजा पाई: जैनाचार्य सौरभ सागर महाराज

 

जिला कारागार में कैदियों को दिया प्रवचन, कहा - यह जेल नहीं, सुधार गृह है



नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। केवल कुछ क्षण का क्रोध और पूरा जीवन बर्बाद हो जाता है। याद कीजिए वह क्षण जब आपने अपना आपा खोया और आपके हाथों से अपराध हो गया, उसके बाद केवल पश्चाताप ही शेष रह जाता है। किसी कवि ने ठीक ही कहा है - "लम्हों ने ख़ता की थी, सदियों ने सजा पाई।" उक्त उद्गार जैनाचार्य सौरभ सागर जी महाराज ने आज जिला कारागार में कैदियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।


आचार्य श्री ने कहा कि यह अवसर है अपने पापों को धोने का, किए गए कृत्यों को सुधारने का। ये जेल कैदखाना नहीं, अपितु सुधार गृह है। यहां आपको तमाम सुविधाएं मिल रही हैं। दो वक्त की रोटी, रहने-सोने को घर, पहनने को कपड़े यानी रोटी, कपड़ा और मकान की व्यवस्था सरकार कर के दे रही है। आपको बस खुद को पश्चाताप की अग्नि में जलाकर निखारना है। पूज्य संत ने कहा कि आज ऐसा मानिए जैसे रेगिस्तान में प्यासे के समीप कुआं आ गया हो। ये दिगम्बर तपस्वी देह आपके नजदीक है। इसको देखिए - न भोजन का मोह है, न सुख-सुविधा का। 24 घंटे में एक बार भोजन-पानी लेने वाले ये संत स्वयं को इस संसार के आवागमन की जेल से मुक्त करने के लिए तपस्या कर रहे हैं। आप भी अपने कर्मों से इस सांसारिक नियमों की अवहेलना की जेल से मुक्त होने का प्रयास करें। जब बाहर जाएं तो बाकी का जीवन सन्मार्ग पर चलकर बिताएं। यही भाव आपको निखारेगा।


कार्यक्रम का संचालन एवं उद्बोधन करते हुए संयोजक कवि सौरभ जैन सुमन ने कहा कि संतों का समागम वो भी जेल में, ये बहुत बड़ा सौभाग्य है। उन्होंने अमीर खुसरो और निजामुद्दीन औलिया का दृष्टांत सुनाते हुए कहा कि जैसे खुसरो का संबंध औलिया से और औलिया का अल्लाह से था, वैसे ही हम अमीर खुसरो हैं और ये संत हमारे निजामुद्दीन औलिया हैं। इन पर भरोसा रखो, ये हमें ईश्वर से मिला देंगे।


मंगलाचरण प्रसिद्ध कवयित्री डॉ. अनामिका जैन अम्बर ने किया। उन्होंने कहा -


जहाँ पर सच, दया, सम्मान और ईमान रहता है,
वही जाकर वो अल्लाह और वो भगवान रहता है।
अगर तूने निकाला है किसी के पाँव का काँटा,
तो ये तय है तेरे दिल में कोई इंसान रहता है।


जिला कारागार के मुख्य जेलर हरबंश पाण्डेय ने जेल आगमन पर जैनाचार्य सौरभ सागर जी महाराज के पद प्रक्षालन किए एवं श्रीफल भेंट कर स्वागत किया। जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने स्वयं आचार्य श्री को जेल का भ्रमण करवाया। आचार्य श्री ने मंदिर, पाकशाला, अस्पताल आदि का निरीक्षण किया और कहा कि वे अनेक जेलों में प्रवचन के लिए गए हैं, किंतु इस जेल में हरियाली एवं साफ-सफाई कहीं अधिक है।



इस अवसर पर अजय जैन, विजय जैन सर्राफ (आनंद जी परिवार), रिंकू जैन, मयंक अग्रवाल (IIMT), अभिषेक जैन (सारू परिवार), सुशील जैन, समीर जैन, रितेश जैन (अरिहंत ज्वैलर्स), पं. संदीप जैन 'सजल', अनुबंध जैन, आयुष जैन, अनुज जैन एडवोकेट, सुदीप जैन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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