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Sunday, September 27, 2026

वहशी सईद और प्रोफेसर नज़ीर अहमद मलिक को डॉ. मंज़र काज़मी पुरस्कार 2026 से नवाज़ा गया।



नित्य संदेश ब्यूरो

श्रीनगर। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ, उत्तर प्रदेश के उर्दू विभाग की ओर से प्रतिवर्ष प्रदान किए जाने वाले 'डॉ. मंज़र काज़मी पुरस्कार' के अंतर्गत इस वर्ष कथा-सृजन के लिए श्रीनगर के अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कथाकार वहशी सईद तथा कथा-आलोचना के लिए प्रसिद्ध आलोचक प्रोफेसर नज़ीर अहमद मलिक को सम्मानित किया गया। यह सम्मान श्रीनगर के डल गेट स्थित होटल शहनशाह पैलेस में आयोजित एक गरिमापूर्ण समारोह में प्रदान किया गया। समारोह का आयोजन फिक्शन राइटर्स गिल्ड, श्रीनगर तथा नगीना इंटरनेशनल के संयुक्त सहयोग से किया गया।


समारोह की अध्यक्षता जस्टिस बशीर अहमद करमानी ने की। मेरठ से पधारे प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं कश्मीर से प्रोफेसर मोहम्मद ज़माँ आज़ुर्दा, मुंबई से अख्तर काज़मी तथा दिल्ली से पधारे डॉ. परवेज़ शहरयार विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन रहे। समारोह का शुभारंभ संचालक प्रोफेसर इरफ़ान आरिफ़ द्वारा डॉ. मंज़र काज़मी के परिचय से हुआ। इसके पश्चात फिक्शन राइटर्स गिल्ड, श्रीनगर के महासचिव नासिर ज़मीर ने अतिथियों का स्वागत किया। कश्मीर विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग से पधारे शिक्षकों में डॉ. कौसर रसूल ने प्रोफेसर नज़ीर अहमद मलिक का अभिनंदन-पत्र पढ़ा, जबकि डॉ. मुश्ताक हैदर ने वहशी सईद का अभिनंदन-पत्र प्रस्तुत किया। इसके बाद वहशी सईद और प्रोफेसर नज़ीर अहमद मलिक को बारहवाँ डॉ. मंज़र काज़मी पुरस्कार—कथा-सृजन एवं कथा-आलोचना प्रदान किया गया। पुरस्कार के अंतर्गत प्रमाण-पत्र, अभिनंदन-पत्र, स्मृति-चिह्न, शॉल तथा 11 हजार रुपये की नकद राशि प्रदान की गई।


इस अवसर पर नगीना इंटरनेशनल, श्रीनगर और 'हमारी आवाज़, मेरठ के नवीन अंकों का विमोचन भी किया गया। नगीना इंटरनेशनल पर डॉ. मोहम्मद इक़बाल लोन तथा 'हमारी आवाज़' पर डॉ. अब्दुर्रज़ाक़ ने अपने विचार प्रस्तुत किए। अपने सम्मान पर विचार व्यक्त करते हुए प्रोफेसर नज़ीर अहमद मलिक ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के उर्दू विभागाध्यक्ष प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी तथा डॉ. मंज़र काज़मी पुरस्कार समिति के अन्य सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि नेक ए प्लस प्लस विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। आज उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है कि उनकी आलोचनात्मक साहित्यिक सेवाओं को इसका श्रेष्ठ प्रतिफल मिला है। इसके बाद वहशी सईद ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कश्मीर के एक कथाकार का इस पुरस्कार के लिए चयन पूरे कश्मीर के लिए गर्व और प्रसन्नता का विषय है। यह इस बात का प्रमाण है कि डॉ. मंज़र काज़मी पुरस्कार समिति के सदस्य आज की उर्दू कथा-साहित्य की दुनिया पर कितनी गहरी दृष्टि रखते हैं। उन्होंने कहा कि पुरस्कार समिति ने सम्मानित साहित्यकार के शहर में स्वयं जाकर उन्हें सम्मानित करने की एक नई परंपरा स्थापित की है, जो सराहनीय है।



विशिष्ट अतिथि अख्तर काज़मी ने कहा कि उनके भाई स्वर्गीय डॉ. मंज़र काज़मी आधुनिक कथा-साहित्य की जिस परंपरा से जुड़े थे, आज उसी परंपरा के इन दोनों प्रतिनिधियों को सम्मानित करते हुए उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। डॉ. परवेज़ शहरयार ने अपने विचार एक शोधपरक आलेख के रूप में प्रस्तुत किए, जिसकी उपस्थित साहित्यकारों और श्रोताओं ने खूब सराहना की। फिक्शन राइटर्स गिल्ड के अध्यक्ष इंजीनियर शफ़ी अहमद ने कहा कि फिक्शन राइटर्स गिल्ड के सदस्यों को यह सम्मान मिलना हम सभी के लिए गर्व की बात है। इस पुरस्कार ने हमारी संस्था की प्रतिष्ठा में और वृद्धि की है, जिसके लिए हम सम्मान प्रदान करने वाली संस्था के आभारी हैं।


प्रोफेसर मोहम्मद ज़माँ आज़ुर्दा ने पुरस्कार प्राप्त करने वाले दोनों साहित्यकारों को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार के सम्मान उर्दू के कथा-साहित्य से जुड़े लेखकों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करेंगे। इससे कश्मीर में उर्दू कथा-साहित्य की उस परंपरा को और मजबूती मिलेगी, जिसकी कड़ी मंटो तक पहुँचती है। मुख्य अतिथि प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी ने डॉ. मंज़र काज़मी पुरस्कार समिति के उद्देश्यों और कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने इस आयोजन के लिए फिक्शन राइटर्स गिल्ड, श्रीनगर तथा नगीना इंटरनेशनल का आभार व्यक्त किया।


अध्यक्षीय संबोधन में जस्टिस बशीर अहमद करमानी ने समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों और आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि यह एक ऐतिहासिक क्षण है कि वहशी सईद और प्रोफेसर नज़ीर अहमद मलिक को यह सम्मान हमारे सामने, हमारे ही समय में प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस सम्मान से न केवल दोनों पुरस्कार विजेताओं की प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई है, बल्कि इससे कश्मीर का भी गौरव बढ़ा है। समारोह का संचालन प्रोफेसर इरफ़ान आरिफ़ ने कुशलतापूर्वक किया। अंत में ज़हूर अहमद तरंबू ने अत्यंत सुंदर और प्रभावशाली ढंग से धन्यवाद ज्ञापित किया और इसी के साथ समारोह का समापन हुआ।

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