AI के दौर में भी पुस्तकों और पुस्तकालयों की प्रासंगिकता बनी रहेगी : प्रो. जमाल अहमद सिद्दीकी
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस स्टडीज (IBS), चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में बीबीए, बीबीए (हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन), एमबीए एवं एमबीए (हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन) के नवागंतुक विद्यार्थियों के लिए आयोजित दो दिवसीय ‘दीक्षारंभ-2026’ ओरिएंटेशन कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय एवं संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था, अध्ययन संसाधनों, परीक्षा प्रणाली, अनुशासन, प्लेसमेंट, इंटर्नशिप, उद्योग संपर्क एवं करियर विकास के अवसरों से परिचित कराते हुए उच्च शिक्षा की नई यात्रा के लिए तैयार करना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के सेंट्रल लाइब्रेरियन प्रो. जमाल अहमद सिद्दीकी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीक का युग है। विद्यार्थियों के पास ज्ञान प्राप्त करने के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक साधन उपलब्ध हैं, लेकिन तकनीक की उपलब्धता के बावजूद पुस्तकों और पुस्तकालयों का महत्व कम नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट और AI विद्यार्थियों को सूचनाएं उपलब्ध करा सकते हैं, लेकिन किसी विषय को गहराई से समझने, उसके विभिन्न पक्षों का विश्लेषण करने और स्वतंत्र चिंतन विकसित करने के लिए पुस्तकों का अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। प्रो. सिद्दीकी ने कहा कि AI को ज्ञान का विकल्प नहीं, बल्कि ज्ञान प्राप्त करने का सहायक और प्रभावी माध्यम समझना चाहिए। विद्यार्थियों को तकनीक का उपयोग इस प्रकार करना चाहिए कि उनकी जिज्ञासा, रचनात्मकता और आलोचनात्मक सोच मजबूत हो। उन्होंने कहा कि AI से प्राप्त जानकारी को आंख बंद करके स्वीकार करने के बजाय उसकी विश्वसनीयता, स्रोत और संदर्भ को जांचने की आदत विकसित करनी चाहिए। विशेष रूप से उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों के लिए यह आवश्यक है कि वे सूचना और ज्ञान के बीच अंतर को समझें। उन्होंने कहा कि एक विद्यार्थी की वास्तविक बौद्धिक क्षमता केवल परीक्षा में प्राप्त अंकों से निर्धारित नहीं होती, बल्कि यह इस बात से भी तय होती है कि वह किसी विषय को कितनी गहराई से समझता है, प्रश्न करता है, तर्क करता है और उपलब्ध जानकारी का विश्लेषण किस प्रकार करता है। पुस्तकें विद्यार्थियों को धैर्यपूर्वक पढ़ने, विषय की तह तक जाने और अपने विचार विकसित करने की क्षमता प्रदान करती हैं।
सेंट्रल लाइब्रेरियन ने विद्यार्थियों को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की सेंट्रल राजा महेंद्र प्रताप पुस्तकालय की विभिन्न सुविधाओं और संसाधनों से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय का पुस्तकालय विद्यार्थियों के अध्ययन एवं शोध के लिए महत्वपूर्ण संसाधन केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है और इसे उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश स्तर पर भी उत्कृष्ट रैंकिंग प्राप्त है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि विश्वविद्यालय में प्रवेश के साथ ही पुस्तकालय को अपने नियमित विद्यार्थी जीवन का हिस्सा बनाएं। उन्होंने पुस्तकालय की RFID आधारित आधुनिक व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग पुस्तकालय सेवाओं को अधिक सुविधाजनक, व्यवस्थित और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के लिए किया जा रहा है। विद्यार्थियों को उपलब्ध पुस्तकों, डिजिटल संसाधनों और अन्य अध्ययन सामग्री का अधिकतम लाभ उठाना चाहिए।
प्रो. सिद्दीकी ने विश्वविद्यालय पुस्तकालय में वर्ष 1972 से वर्तमान समय तक के प्रमुख समाचार पत्रों की सुरक्षित हार्ड कॉपी उपलब्ध होने को एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं शैक्षणिक संसाधन बताया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता, प्रबंधन, सामाजिक विज्ञान और अन्य विषयों के विद्यार्थियों के लिए पुराने समाचार पत्र केवल सूचना का स्रोत नहीं हैं, बल्कि वे विभिन्न कालखंडों की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक परिस्थितियों को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। विद्यार्थियों को ऐसे संसाधनों का उपयोग अपने अध्ययन, शोध और सामान्य ज्ञान को समृद्ध करने के लिए करना चाहिए। उन्होंने नवागंतुक विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहें। प्रतिदिन कुछ समय नियमित पठन के लिए निर्धारित करें, अच्छे समाचार पत्र और पुस्तकें पढ़ें तथा अपने विषय से जुड़े नवीनतम घटनाक्रमों पर नजर रखें। उन्होंने कहा कि लगातार पढ़ने की आदत विद्यार्थी के व्यक्तित्व और भाषा दोनों को समृद्ध करती है तथा उसे अपने विचार प्रभावी ढंग से व्यक्त करने में सक्षम बनाती है।
संस्थान की उप निदेशिका डॉ. अंशु चौधरी ने दोनों दिवसों में नवागंतुक विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि संस्थान का उद्देश्य उन्हें केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि अकादमिक ज्ञान के साथ व्यक्तित्व विकास, अनुशासन, नैतिक मूल्यों, सकारात्मक दृष्टिकोण और जिम्मेदार नागरिकता के लिए तैयार करना है। प्लेसमेंट ऑफिसर डॉ. मनु शर्मा ने विद्यार्थियों को प्लेसमेंट गतिविधियों, रोजगार के अवसरों, इंडस्ट्री इंटरैक्शन, इंटर्नशिप एवं करियर विकास से संबंधित विभिन्न पहलों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रारंभ से ही अपने करियर लक्ष्य निर्धारित करने और उद्योग की अपेक्षाओं के अनुरूप आवश्यक कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर डॉ. रविशा चौधरी ने विभागीय लाइब्रेरी एवं अध्ययन संसाधनों, जबकि डॉ. संजय सिंह ने परीक्षा प्रणाली एवं परीक्षा संबंधी प्रक्रियाओं की जानकारी दी। डॉ. मनी गर्ग एवं स्वाति शर्मा ने विद्यार्थियों को एंटी-रैगिंग नियमों एवं प्रावधानों के प्रति जागरूक किया। विभिन्न सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक संस्कृति, उपलब्ध सुविधाओं, अनुशासनात्मक व्यवस्था तथा विश्वविद्यालय जीवन से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराया गया।
दो दिवसीय ‘दीक्षारंभ-2026’ में विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा की अपेक्षाओं, प्रभावी अध्ययन की आदतों, AI के जिम्मेदार उपयोग, व्यक्तित्व विकास तथा भविष्य की करियर संभावनाओं के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम का संचालन क्रमशः डॉ. शिखा वशिष्ठ एवं डॉ. रीना सिंह द्वारा किया गया। स्वागत उद्बोधन डॉ. रवि प्रकाश एवं डॉ. नीरज चौधरी तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. स्वाति अग्रवाल एवं डॉ. पूजा चौहान द्वारा किया गया। इस अवसर पर बीबीए की कोऑर्डिनेटर डॉ. नेहा गर्ग, बीबीए (हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन) की कोऑर्डिनेटर डॉ. प्रिया सिंह, एमबीए के कोऑर्डिनेटर डॉ. राहुल शर्मा एवं एमबीए (हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन) की कोऑर्डिनेटर डॉ. मणि गर्ग सहित संस्थान के शिक्षकगण एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। ‘दीक्षारंभ-2026’ नवागंतुक विद्यार्थियों के लिए महज परिचयात्मक कार्यक्रम न रहकर विश्वविद्यालय जीवन की नई शुरुआत, सीखने की नई दृष्टि और भविष्य के करियर की दिशा निर्धारित करने का प्रभावी मंच बना। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि आधुनिक तकनीक का अधिकतम लाभ उठाते हुए पुस्तकों, पुस्तकालयों और पारंपरिक अध्ययन संसाधनों से जुड़ाव बनाए रखना ही समग्र एवं गहन शिक्षा की मजबूत आधारशिला है।

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