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Friday, August 7, 2026

विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया


नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ संकल्प अभियान को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाने एवं युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से दूर रखते हुए स्वस्थ, जागरूक, संस्कारित और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित बनाने के उद्देश्य से आज लखनऊ में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेन्द्र उपाध्याय ने की।

बैठक में विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र भारद्वाज, श्री चंद शर्मा, कुंवर मानवेंद्र सिंह, उमेश द्ववेदी,  बाबूलाल त्रिवेदी, अवनीश सिंह, प्रदेश महामंत्री संजय राय सहित प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों एवं अन्य संबंधित अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। बैठक में युवाओं को नशे से दूर रखने, उच्च शिक्षण संस्थानों में जागरूकता अभियान को प्रभावी बनाने तथा युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण की दिशा में सकारात्मक रूप से जोड़ने को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि देश की युवा शक्ति भारत की सबसे बड़ी ताकत है। यदि युवा स्वस्थ, शिक्षित, अनुशासित, संस्कारित और नशामुक्त होंगे तो वे देश के विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसलिए शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से युवाओं में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता पैदा करना और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र भारद्वाज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। स्वस्थ, जागरूक और संस्कारित युवा ही विकसित भारत की सबसे मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि इससे परिवार, समाज और राष्ट्र भी प्रभावित होता है। इसलिए युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, अभिभावकों और समाज को मिलकर निरंतर प्रयास करने होंगे।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थान केवल शिक्षा प्रदान करने के केंद्र नहीं हैं, बल्कि युवा व्यक्तित्व के निर्माण और राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण केंद्र भी हैं। ऐसे में विश्वविद्यालयों में नशामुक्ति को लेकर जागरूकता कार्यक्रम, संवाद, कार्यशालाएं, शपथ अभियान और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां आयोजित कर युवाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान की जा सकती है।

इस अवसर पर ‘भारत की नींव’ (राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020) पुस्तक का विमोचन भी किया गया। पुस्तक को शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से शिक्षा को अधिक व्यापक, रोजगारपरक, संस्कारयुक्त एवं भारतीय मूल्यों से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को भी बैठक में रेखांकित किया गया।

विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ खेल, योग, सांस्कृतिक गतिविधियों, नवाचार, शोध और सामाजिक सेवा जैसी सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर चर्चा हुई।

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