नित्य संदेश
कुछ मित्र ऐसे भी मिल जाते है
कुछ मित्र ऐसे भी मिल जाते है,
बन कर इत्र जीवन महकाते है।
दूरियां जितनी भी हो शहरों की,
साथ बड़ी सहजता से निभाते है।
कुछ मित्र ऐसे भी मिल जाए है...
बात होती है बस पल दो पल की,
लेकिन हम उत्साह से भर जाते है।
बन कर सखा साथ मुस्कुराते है,
निस्वार्थ अपनत्व सिखाते हैं ।
कुछ मित्र ऐसे भी मिल जाए है...
नियति तय करती है कुछ रिश्तों को,
वरना कहा मन ऐसे मिल पाते है।
भीड़ भरी इस दुनिया के मधुवन में,
यू तो हजारों हम से टकराते है।
लेकिन,
कुछ मित्र ऐसे भी मिल जाते है...
कुछ मित्र ऐसे भी मिल जाते है...
रविन्द्र तंवर "सूर्योदय"
बड़वाह (म. प्र.)


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