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Monday, August 24, 2026

हमें हमेशा सत्य वचन बोलना चाहिए, चंद्रगुप्त मौर्य का परिश्रम ही सफलता की कहानी है

नवीन मौर्य

नित्य संदेश, इंदौर। चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अपने गुरु चाणक्य के आदेशों का पालन करते हुए परिश्रम किया और सफलता प्राप्त की ।गांधी जी ने कहा है कि जीवन में सत्य का पालन करते हुए अहिंसा पर डटे रहना चाहिए सत्य वचन बोलने से हमें लक्ष्य की प्राप्ति होती है। यह मन के विचार छोटे-छोटे बच्चों से आज संस्कार पाठशाला में कहो कहानी प्रतियोगिता के अवसर पर सुनाई। 


वही एक बच्चे ने बड़ी प्रेरणादायक कहानी सुनाते हुए कहा कि बचपन में जिस बच्चे को पढ़ाई के लिए पैसे ना होने  से गांव वालों ने चंदा लेकर उसको पढ़ाया आज वह जीवन में अपने परिश्रम के बल पर कलेक्टर के पद पर बैठा हुआ है उसने अपने गांव में स्कूल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी स्थापित करवाया तो आदमी अपनी इच्छा शक्ति से कुछ भी संभव कर सकता है । दो बच्चों ने इंग्लिश मैं बोलते हुए कहानी सुनाई बच्चों की अधिकांश कहानियां शिक्षाप्रद एवं प्रेरक प्रसंग पर आधारित थी जिसमें कछुए की दौड़ से लेकर प्राचीन घटनाओं पर भी कहानी सुनाई गई। मानवी ने अभ्यास के महत्व को बताते हुए प्रेरक प्रसंग सुनाया वही सौम्या ने संस्कारों का मूल्य बताते हुए शिक्षाप्रद कहानी सुनाई। देवी अहिल्या के 231 वे पुण्य स्मरण समारोह की श्रृंखला में चल रहे आयोजनों के तहत कहो कहानी  प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था विशेष बात यह थी इसमें ग्रामीण बच्चों के दृष्टिहीन संस्था के साथ छोटे-छोटे विद्यालयों बस्तियों में रहने वाले  पढ़ने वाले बच्चे शामिल थे।

प्रतियोगिता के प्रमुख ज्योत्सना खर्राटे एवं संयोजक तृप्ति महाजन ने बताया कि यह आयोजन तीन केंद्रों महेश दृष्टिहीन कल्याण संघ स्कीम नंबर 54 मैं 22 अगस्त को हुआ था वहीं आज 24 अगस्त को संस्कार पाठशाला मुंबई हॉस्पिटल के सामने कार्यक्रम संपन्न हुआ बरेली ग्रामीण संस्था बड़ी भमोरी पर यह कार्यक्रम 26 अगस्त को होगा। प्रतियोगिता के निर्णायक मधुलिका शर्मा एवं प्रथा जैन, सुधा चौहान थी। पलक मालवीय, खुशबू, मानवी, टीना कुशवाहा, खुशबू भाटिया, विशाखा पटेल ने प्रथम द्वितीय तृतीय पुरस्कारों पर अपना अधिकार जमाया। प्रोत्साहन पुरस्कार वीर वाल्मीकि पूनम प्रजापत सौम्या, राजा एवं ओम पवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर अध्यक्षता संस्था के आचार्य विवेकानंद जी ने की एवं मुख्य अतिथि महेश जोशी  एवं संगीता जोशी थे। अतिथियों का स्वागत अचला गंधे, तृप्ति महाजन सुमेधा बावकर ने किया वही संचालन आभिधा विरुमाल शर्मा ने किया।

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