टीबी के खिलाफ सुभारती के स्वयंसेवकों ने बुलंद की जागरूकता की आवाज
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। क्षय रोग (टीबी) के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसके उन्मूलन के लिए लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई-द्वितीय की ओर से खारवेल सुभारती कॉलेज ऑफ फार्मेसी में ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में एनएसएस स्वयंसेवकों ने टीबी की रोकथाम, बचाव, लक्षणों की पहचान, प्रारंभिक जांच और उचित उपचार के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें एनएसएस इकाई-द्वितीय के स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। स्वयंसेवकों ने अपने आकर्षक और संदेशपरक पोस्टरों के माध्यम से टीबी के लक्षणों, बचाव के उपायों, समय पर उपचार और बीमारी के प्रति समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने का संदेश दिया। पोस्टरों में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता के साथ यह संदेश भी दिया कि जागरूकता और समय पर उपचार से टीबी को हराया जा सकता है। इस अवसर पर खारवेल सुभारती कॉलेज ऑफ फार्मेसी के अधिष्ठाता एवं प्राचार्य प्रो. (डॉ.) सोकिंद्र कुमार ने ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ विषय पर जागरूकता व्याख्यान दिया। उन्होंने टीबी के प्रमुख कारणों, लक्षणों, बचाव के उपायों और समय रहते रोग की पहचान के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि टीबी के उपचार में लापरवाही बीमारी को गंभीर बना सकती है, इसलिए चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित और पूरा उपचार करना बेहद जरूरी है।
प्रो. (डॉ.) सोकिंद्र कुमार ने एनएसएस स्वयंसेवकों का आह्वान किया कि वे टीबी के प्रति स्वयं जागरूक होने के साथ अपने परिवार, मित्रों और आसपास के लोगों को भी जागरूक करें। उन्होंने कहा कि युवा समाज में सकारात्मक बदलाव के प्रभावी वाहक हैं और उनकी जागरूकता से टीबी मुक्त भारत के अभियान को और गति मिल सकती है। कार्यक्रम में एनएसएस इकाई-द्वितीय के स्वयंसेवकों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए ‘टीबी मुक्त भारत’ के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने और स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी, स्वास्थ्य जागरूकता और जनसेवा की भावना को मजबूत किया। कार्यक्रम का आयोजन एवं संचालन एनएसएस इकाई-द्वितीय के कार्यक्रम अधिकारी निशांत गौरव के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

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