डॉक्टर इफ्फत ज़किया
नित्य संदेश, मेरठ। 20 सफर-उल-मुजफ्फर को इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके जानिसार साथियों के चेहलुम के मौके पर मेरठ में अकीदत व एहतराम के साथ जुलूसे अरबईन निकाला गया।
मोहर्रम कमेटी की मीडिया प्रभारी डॉ. इफ्फत जकिया ने बताया कि इस मौके पर इमामबारगाह छोटी कर्बला, लाला बाजार में शोहदा-ए-कर्बला के चेहलुम की मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस का आगाज दानिश आबिदी की सोजख्वानी से हुआ। अरबईन-ए-हुसैनी की मजलिस को मौलाना हाफिज हसन रजा साहब ने संबोधित किया। उन्होंने कहा - "कर्बला का सबक यह है कि जीत हमेशा उन्हीं की होती है जो सच के लिए लड़ते हैं और डटे रहते हैं। जो झूठ के सामने डटा रहता है, वही इतिहास में सबसे ऊपर रहता है। इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके वफादार साथियों ने इस्लाम, इंसानियत और खुदा के दीन की शान के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी, लेकिन जुल्म के आगे झुके नहीं। अरबईन हमें याद दिलाता है कि सच का रास्ता कुर्बानी, सब्र और मजबूती का रास्ता है, और यह रास्ता इज्जत और कामयाबी की मंजिल तक ले जाता है।"
उन्होंने इमाम (अ.स.) की कुर्बानी के पैगाम और अरबईन के फलसफे पर रोशनी डाली। मसाइब में उन्होंने हजरत जैनब (स.अ.) की कर्बला वापसी, शाम की कैद से रिहाई और इमाम हुसैन (अ.स.) की कब्र पर गिरया व मातम के दर्दनाक मंजर को बयान किया, जिसे सुनकर मजलिस में मौजूद अजादार अश्कबार हो गए।
मजलिस के बाद इमाम बारगाह छोटी कर्बला से जुलूसे ताजिया बरामद हुआ, जिसके संयोजक हसन मुर्तजा (रजा) रहे। यह जुलूस अपनी पारंपरिक शान-ओ-शौकत के साथ घंटाघर स्थित अजाखाना शाह-ए-कर्बला से होता हुआ शाम को रेलवे रोड स्थित कर्बला वक्फ मनसबिया और कब्रिस्तान हाजी साहब पहुंचकर खत्म हुआ।
जुलूस में अंजुमन इमामिया की ओर से वाजिद अली गप्पू, साहिल अली और मीसम, अंजुमन दस्ता-ए-हुसैनी की ओर से हुमायूं अब्बास, अतीक अल हसनैन, गजाल और अंजुमन तंजीम-ए-अब्बास की ओर से सफदर हिंदुस्तानी व अन्य नौहाख्वानों ने नौहाख्वानी कर खिराजे अकीदत पेश की।
गमगीन माहौल और सोगवार फिजा में ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। जुलूस में भारी तादाद में अकीदतमंदों ने शिरकत कर हजरत मोहम्मद (स.अ.व.) को उनके नवासे और शोहदा-ए-कर्बला का पुरसा पेश किया।
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