नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग एवं आयुसा (IYUSA) के संयुक्त तत्वावधान में "चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की शैक्षिक सेवाएँ" विषय पर एक ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश-विदेश के शिक्षाविदों एवं साहित्यकारों ने विश्वविद्यालय की शैक्षिक उपलब्धियों, शोध परंपरा तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी प्रतिष्ठा पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कला संकाय के डीन प्रो. अतवीर सिंह ने कहा कि देश के अनेक विश्वविद्यालयों के पुस्तकालयों की तुलना में सीसीएस विश्वविद्यालय की अपनी विशिष्ट पहचान और महत्वपूर्ण विशेषताएँ हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ ही गुणवत्तापूर्ण शोध को प्राथमिकता दी गई, जिसका परिणाम है कि आज यहाँ से निकलने वाले विद्यार्थी और शोधार्थी देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जहाँ कभी विश्वविद्यालय में लगभग 400 विद्यार्थी थे, वहीं आज उनकी संख्या बढ़कर लगभग 7,000 हो चुकी है। अनेक व्यावसायिक पाठ्यक्रम, चौबीसों घंटे बिजली-पानी की सुविधा, हरित परिसर तथा उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण विश्वविद्यालय की पहचान बन चुके हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ सईद अहमद द्वारा पवित्र कुरआन के पाठ से हुआ। कार्यक्रम का संरक्षण अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आलोचक डॉ. तक़ी आबिदी (कनाडा), उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. असलम जमशेदपुरी तथा प्रो. सगीर अफराहीम ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. जमाल अहमद सिद्दीकी तथा इंग्लैंड से प्रसिद्ध कथाकार अमीर मेहदी ऑनलाइन जुड़े। मुख्य वक्ता के रूप में इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. के. के. शर्मा ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सैयदा खान ने किया।
विषय-प्रवर्तन करते हुए डॉ. इरशाद सियानवी ने कहा कि विश्वविद्यालय की वर्तमान कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला, विभिन्न संकायों के डीन, वरिष्ठ प्राध्यापक एवं अधिकारी अपनी प्रतिबद्धता और मेहनत से विश्वविद्यालय को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा रहे हैं। इसी का परिणाम है कि विश्वविद्यालय को A++ ग्रेड प्राप्त हुआ है।
प्रो. असलम जमशेदपुरी ने कहा कि आज सीसीएस विश्वविद्यालय पूरे देश में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। विश्वविद्यालय के अनेक विभाग राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि लगभग 202 एकड़ में फैला यह विश्वविद्यालय अपनी उपलब्धियों के कारण निरंतर नई पहचान बना रहा है।
इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. के. के. शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय ने 1857 की क्रांति से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने लाने का कार्य किया है और उन्हें संग्रहालय में भी स्थान दिया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से भारतीय संस्कृति और सभ्यता का प्रभावी प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। साहित्य, नाटक और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में रचनात्मकता का विकास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एनएसएस और एनसीसी के माध्यम से युवाओं में राष्ट्रसेवा और समाजसेवा की भावना भी विकसित की जाती है।
प्रो. जमाल अहमद सिद्दीकी ने कहा कि उन्हें इस विश्वविद्यालय की सेवा करते हुए 23 वर्ष हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय की कई विशेषताएँ इसे देश के अन्य विश्वविद्यालयों से अलग बनाती हैं। वर्ष 1973 से 2026 तक के समाचार-पत्रों का संग्रह, सभी प्रमुख धर्मों की पुस्तकों का अलग अनुभाग, आधुनिक सुरक्षा प्रणाली, लगभग 1.85 लाख पुस्तकों का विशाल भंडार तथा 14 हजार ई-जर्नल इसकी प्रमुख उपलब्धियाँ हैं। उन्होंने बताया कि पुस्तकालय में 22,357 उर्दू पुस्तकों का भी समृद्ध संग्रह उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रगति में प्रत्येक शिक्षक, कर्मचारी और विभाग का समान योगदान है।
प्रो. सगीर अफराहीम ने कहा कि अनुशासन, उत्कृष्ट शोध और गुणवत्तापूर्ण कार्य ही विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी ताकत हैं। इसी कारण विश्वविद्यालय को A++ ग्रेड प्राप्त हुआ है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए कुलपति सहित पूरे विश्वविद्यालय परिवार को बधाई दी।
प्रो. रेशमा परवीन ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे कार्य प्रेरणादायक हैं तथा विद्यार्थियों को सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इंग्लैंड से जुड़े कथाकार अमीर मेहदी ने कहा कि उर्दू साहित्य की सेवा में प्रो. असलम जमशेदपुरी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने विश्वविद्यालय के पुस्तकालय और शैक्षणिक संसाधनों की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय के लिए A++ ग्रेड प्राप्त करना अत्यंत गौरव की बात है।
कनाडा से डॉ. तक़ी आबिदी ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि उर्दू को केवल बोलचाल की भाषा तक सीमित न रखकर अध्ययन और लेखन की भाषा के रूप में भी सशक्त बनाया जाए। इसमें विश्वविद्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि उर्दू हमारी साझा संस्कृति और तहज़ीब की भाषा है तथा वर्तमान समय में सभी को मिल-जुलकर इसके विकास के लिए कार्य करना चाहिए। विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को देखकर स्पष्ट होता है कि यह अपने प्रकार का एक महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थान है।
कार्यक्रम में डॉ. आसिफ अली, डॉ. अलका वशिष्ठ, सैयदा मरियम इलाही, शाह-ए-ज़मन सहित अनेक शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएँ भी ऑनलाइन उपस्थित रहे।

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