एसटीपी के सफल आयोजन के बाद बोले प्रतिभागी- शोध उत्कृष्टता को मिलेगा नया आयाम
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठः भाषा विभाग, कला एवं सामाजिक विज्ञान संकाय तथा रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल, स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय एवं राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईटीटीटीआर), चंडीगढ़, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग एवं संयुक्त तत्वावधान में "रिसर्च मेथोडोलॉजी" विषय पर एक सप्ताह के लघु-अवधि राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य समापन सुभारती विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय के सम्मेलन सभागार में हुआ।
कार्यक्रम के अंतिम दिन डॉ. ए. बी. गुप्ता, समन्वयक, एनआईटीटीटीआर, चंडीगढ़ ने पूरे सप्ताह में अध्ययन किए गए विषयों का सार प्रस्तुत करते हुए शोध अभिकल्प, साहित्य समीक्षा, आँकड़ा संकलन, सांख्यिकीय विश्लेषण, शोध नैतिकता एवं अकादमिक लेखन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। अपने संबोधन में डॉ. गुप्ता ने कहा कि शोध केवल उपाधि प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि नवाचार, जिज्ञासा और ज्ञान सृजन की सतत प्रक्रिया है। संवादात्मक सत्र में प्रतिभागियों ने शोध पद्धति, गुणवत्ता संवर्धन एवं प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में प्रकाशन से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. गुप्ता ने व्यावहारिक उदाहरणों के साथ प्रभावी समाधान प्रस्तुत किया। इसके अतिरिक्त अपने समापन उद्बोधन में डॉ. ए. बी. गुप्ता ने भाषा विभाग, शोध एवं विकास प्रकोष्ठ, इस कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. रफ़त खानम तथा स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा की गई उत्कृष्ट व्यवस्थाओं, आवासीय सुविधा, भोजन, अनुशासित आयोजन, शिक्षकों के सहयोग एवं आत्मीय आतिथ्य की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रतिभागियों के लिए उपलब्ध कराई गई सुविधाएँ अत्यंत उत्कृष्ट एवं अनुकरणीय रहीं। उन्होंने प्रतिभागियों को मौलिक, नैतिक एवं समाजोपयोगी शोध करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध ही राष्ट्र निर्माण और वैश्विक ज्ञान-विस्तार का आधार बन सकता है।
इसके उपरान्त प्रतिभागी अनुभव एवं फीडबैक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से आए शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। प्रतिभागियों ने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत ज्ञानवर्धक, उपयोगी एवं प्रेरणादायक रहा। उन्होंने सभी विशेषज्ञों के व्याख्यानों को शोधपरक, व्यावहारिक एवं सरल शिक्षण शैली से परिपूर्ण बताया तथा कहा कि लंबे समय बाद उन्हें इतने व्यवस्थित एवं उच्च गुणवत्ता वाले अकादमिक प्रशिक्षण में सहभागिता का अवसर प्राप्त हुआ, जिससे उनके शोध दृष्टिकोण का व्यापक विकास हुआ है जिसका प्रभाव आने वाले दिनों में उनके दैनिक शिक्षण में दिखाई पड़ेगा।
इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) सीमा शर्मा, विभागाध्यक्ष, भाषा विभाग, स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ ने सभी प्रतिभागियों को उनकी सक्रिय सहभागिता के लिए बधाई देते हुए कहा कि शोध अकादमिक उत्कृष्टता की आधारशिला है और इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान उनके भावी शोध कार्यों को नई दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने एनआईटीटीटीआर, चंडीगढ़, विश्वविद्यालय प्रशासन, शोध एवं विकास प्रकोष्ठ, आयोजन समिति तथा सभी रिसोर्स पर्सनस के प्रति आभार व्यक्त किया।
राष्ट्रीय अल्पकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. रफ़त खानम ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए प्रतिदिन आयोजित अकादमिक गतिविधियों का क्रमवार विवरण दिया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में शोध की मूलभूत अवधारणाएँ, शोध समस्या का निर्धारण, साहित्य समीक्षा, प्रायोगिक शोध अभिकल्प, आँकड़ा संकलन के उपकरण, परिकल्पना परीक्षण, सांख्यिकीय तकनीकें, टी-टेस्ट, शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उत्तरदायित्वपूर्ण उपयोग, शोध प्रकाशन प्रक्रिया, शोध नैतिकता, शोध लेखन एवं शोध प्रतिवेदन निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए।
कार्यक्रम के अंत में आधिकारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रो. (डॉ.) वैभव गोयल भारतीय, अधिष्ठाता, शोध एवं विकास प्रकोष्ठ द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन, एनआईटीटीटीआर, चंडीगढ़, सभी विशिष्ट वक्ताओं, आयोजन समिति, संकाय सदस्यों, स्वयंसेवकों एवं प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम की सफलता में सभी के सामूहिक सहयोग की सराहना की।
समापन समारोह का प्रभावशाली एवं गरिमामय मंच संचालन विधि गोस्वामी द्वारा किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ हुआ। इस अवसर पर ललित कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) पिंटू मिश्रा, कला एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) सुधीर त्यागी, प्रो. (डॉ.) सीमा शर्मा, प्रो. (डॉ.) वैभव गोयल भारतीय, डॉ. ए. बी. गुप्ता, डॉ. मनीषा, डॉ. निशी, डॉ. आकांक्षा, डॉ. प्रीति, डॉ. शिप्रा, डॉ. विजय, अंकीत, डॉ. स्वाति, सुश्री सोनी, सुश्री भावना, सुश्री सान्या, डॉ. निशा सिंह, डॉ. सारिका अभय, डॉ. मुकेश रुहेला तथा डॉ. श्वेता भारद्वाज सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य उपस्थित रहे। साथ ही भूमि, फ़हद, यशिका, ज्योति, प्राची एवं प्रज्ञा सहित विश्वविद्यालय के अनेक विद्यार्थी तथा देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए 100 से अधिक शिक्षक, शोधार्थी एवं प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
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