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Friday, June 19, 2026

“Commercialization of Innovation: From Dharma to Market — Dharmic and Mimamsa Perspectives” विषय पर व्याख्यान दिया




नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विवि के विधि अध्ययन संस्थान के समन्वयक डॉ. विवेक कुमार त्यागी ने कुटाफिन मॉस्को स्टेट लॉ यूनिवर्सिटी में आयोजित 7वीं समर स्कूल ऑफ फॉरेन लॉ में “Commercialization of Innovation: From Dharma to Market — Dharmic and Mimamsa Perspectives” विषय पर व्याख्यान दिया। इस कार्यक्रम में रूस, ब्राज़ील, इक्वाडोर, चीन, भारत, कांगो गणराज्य (अफ़्रीका), पेरू और तंजानिया देशों के प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया।

डा0 विवेक कुमार त्यागी ने अपने व्याख्यान में एक नई विचारधारा पर जोकि वैश्विक विधिक जगत में सम्भवतः चर्चा का विषय नहीं रही है पर अपना मत रखते हुये पश्चिम दृष्टिकोण जोकि अनुसंधान के केवल व्यापारिक महत्त्व और उसके बाजारीकरण के अधिकार पर आधारित है कि व्याख्या धर्म (कर्तव्य) बाजार और धार्मिक और भारतीय दृष्टिकोण एवं मीमांसा आधारित परिपेक्ष्य में की जोकि व्यक्तिगत के साथ - साथ सामाजिक सरोकर और वैश्विक हित को दृष्टिगत रखती है। डा0 त्यागी ने कहा है कि ऐसे शोध और नवाचार जोकि सार्वजनिक स्रोतो से आर्थिक सहायता के सायै अथवा सार्वजनिक स्रोतो से विकसित किये गये हो, पर प्रथम अधिकार सार्वजनिक होना चाहिये। साथ ही उसके लाभ को भी उन्ही सार्वजनिक उपक्रमों के लिये इस्तेमाल किया जायें। डा0 त्यागी ने नगोया प्रोटोकॉल का सन्दर्भ देते हुये लाभ के वितरण और स्थानीय स्रोतो और ज्ञान की महत्ता पर भी अपना सकारात्मक मत व्यक्त किया।

डा0 त्यागी के व्याख्यान के द्वारा यह भी स्थापित करने का प्रयास किया गया कि वैश्विक बौद्धिक सम्पदा से सम्बन्धित संविदाओं, तकनीक हस्तान्तरण एवं अन्य ऐसे विषय जहाँ स्पष्टता ना हो वहा पर मीमांसा एवं पूर्व मीमांसा हेर्मेनेयुटिक्स के माध्यम से उनकी व्याख्या की जाये जो सिर्फ शब्दों की व्याख्या मात्र ना हो।  

इसके पश्चात् उन्होने अपने व्याख्यान में यह प्रतिपादित किया कि नवाचार का व्यावसायीकरण केवल लाभ कमाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सामाजिक हित, सार्वजनिक लाभ और नैतिक दायित्व से जुड़ी एक विधिक प्रक्रिया भी है । उन्होने यह तर्क प्रस्तुत किया कि बौद्धिक संपदा और नवाचार कानून को केवल निजी अधिकार के रूप में नहीं, बल्कि सार्वजनिक निवेश, उत्तरदायित्व और न्यायसंगत वितरण की दृष्टि से समझा जाना चाहिए । प्रस्तुति में भारत, रूस और ब्रिक्स देशों के नवाचार ढांचे की तुलनात्मक समीक्षा की। इसमें प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, लाइसेंसिंग, मूल्य निर्धारण, पहुँच की समानता, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, पारंपरिक ज्ञान तथा जलवायु प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों में विधिक शासन पर विशेष चर्चा की। 

व्याख्यान का एक महत्वपूर्ण पक्ष मीमांसा-आधारित व्याख्यात्मक दृष्टिकोण रहा, जिसके माध्यम से अनुदान, लाइसेंसिंग, शोध सहयोग और लाभ-साझेदारी जैसे अनुबंधों की व्याख्या उनके उद्देश्य, संदर्भ और सामाजिक उपयोगिता के आलोक में करने की बात कही।  साथ ही भारत की राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा नीति और ब्रिक्स नवाचार कार्यक्रमों को व्यावसायीकरण की ऐसी नीति-रचना के रूप में रेखांकित किया, जो आर्थिक रूप से व्यावहारिक होने के साथ-साथ समाजोपयोगी भी हो । डॉ. त्यागी का यह व्याख्यान नवाचार कानून, विधिशास्त्र और ज्ञान के न्यायसंगत प्रसार पर अंतरराष्ट्रीय अकादमिक संवाद को नई दिशा  देगा।

इस कार्यक्रम में प्रो0 बलेझिव विक्टर व्लादिमीरोविच (रेक्टर, ओ.ई. कुटाफिन, मास्को स्टेट लॉ यूनिवर्सिटी), प्रो0 व्लादिमीर, निकोलोविच सिनयोकोव (वाइस रेक्टर फोर रिसर्च, ओ.ई. कुटाफिन, मास्को स्टेट लॉ यूनिवर्सिटी), प्रो0 इगोरोवा मारिया एलेक्सजन्डरोवा (हेड ऑफ स्कूल), प्रो0 कासकिन सरगे यूरीविच (हेड इंटेग्रेशन एण्ड यूरोपियन लॉ, ओ.ई. कुटाफिन, मास्को स्टेट लॉ यूनिवर्सिटी), ऐलन डफलोट (लॉ फर्म के निदेशक) आदि उपस्थित रहे।

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