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Saturday, June 27, 2026

"मुंह में राम, बगल में छुरी"

नित्य संदेश। राम मंदिर के चढ़ावे में हुई चोरी की घटना पर प्रश्न उठाने वालों को पहले जमीनी हकीकत समझनी चाहिए। क्या चंपत राय जी का कोई निजी परिवार है? क्या उनकी बीवी या बच्चे हैं? इसका उत्तर है— नहीं। न ही वे जीवन के इस पड़ाव पर हैं कि वे कोई घर बसाएंगे, जिससे उन पर स्वलाभ के लिए ऐसा करने का मनगढ़ंत आरोप लगाया जा सके।

यह सर्वविदित है कि उन्होंने अपना पूरा जीवन प्रभु श्री राम के चरणों में समर्पित कर दिया। रसायन शास्त्र (केमेस्ट्री) के सरकारी प्रोफेसर पद की गरिमामयी नौकरी उन्होंने सिर्फ इसलिए छोड़ दी थी, ताकि वे पूर्ण समर्पण के साथ राम मंदिर आंदोलन के पक्ष में खड़े हो सकें।

राम मंदिर के लिए संघर्ष करने वाली टोली का नेतृत्व करने से लेकर, अदालत की हर पैरवी में उन्होंने स्वयं की उपस्थिति दर्ज कराई है। उनके पास ऐतिहासिक और कानूनी किताबों का ऐसा अनूठा भंडार है, जिससे उन्होंने वकीलों को पैरवी के लिए सटीक संदर्भ उपलब्ध कराए। अपने इसी निस्वार्थ समर्पण के कारण वे भक्तों के बीच "राम जी के पटवारी" के रूप में प्रसिद्ध हैं।

उनका संपूर्ण जीवन केवल राम काज के लिए ही समर्पित रहा है और उनकी अंतिम इच्छा भी यही होगी कि वे अपने जीवन का अंतिम क्षण प्रभु की सेवा में ही बिताएं; इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी और पवित्र जिम्मेदारी को सहर्ष स्वीकार किया था।

वास्तव में, 80 वर्ष की आयु के इस पड़ाव पर वे अपने आसपास रहने वाले कुछ 'मलिन मन' के लोगों पर गलत भरोसा कर बैठे। वे अपने इर्द-गिर्द ऐसे लालची तत्वों से घिर गए थे, जिनके लिए सहज ही कहा जा सकता है— "मुंह में राम, बगल में छुरी।"

निश्चित ही चढ़ावा चोरी की इस घिनौनी करतूत की जानकारी उन्हें भी बाद में ही लगी होगी। इस परिस्थिति को हम अपने आम जीवन के एक उदाहरण से बखूबी समझ सकते हैं। हमारे घर जब कोई रसोईया या सहायक लंबे समय से साथ काम कर रहा हो, तो हम उस पर "आंख मूंदकर भरोसा" करने लग जाते हैं। इसी विश्वास के कारण हम उसे भंडारण और रखरखाव की जिम्मेदारी भी सौंप देते हैं। लेकिन यदि वही रसोइया सूखे मेवे या मिष्ठान देखकर छिपकर खाने लगे, तो सहज रूप से हमें उसकी तलाशी लेने का विचार भी नहीं आता, क्योंकि हम उसे अपना समझकर उस पर अटूट विश्वास कर रहे होते हैं।

ऐसा ही निष्कपट भरोसा चंपत राय जी भी कर बैठे थे। उन्हें जो भी करीब से जानता है, वह यह भली-भांति मानता है कि वे राम काज में कभी कुछ गलत नहीं कर सकते। यही कारण है कि जैसे ही उन्हें अपने आसपास कुछ गलत होने का संदेह हुआ, उन्होंने तुरंत एस.आई.टी. (SIT) की जांच का सहयोग किया और अपने पद से इस्तीफा दे दिया, ताकि मर्यादा, पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच अक्षुण्ण बनी रहे।

चढ़ावा चोरी उनके आसपास काम करने वाले कुछ छोटे घटकों की ही मिलीभगत का परिणाम है, जिन्होंने कभी जीवन में इतनी बड़ी धनराशि देखी नहीं थी। राम जी के इस पवित्र खजाने को देखकर उनका ईमान डगमगा गया। उन्हें न तो लोक-लाज का भय रहा और न ही ईश्वर का, इसलिए उन्होंने चालाकी से यह चोरी की। पर सत्य तो यही है कि उस परमपिता परमेश्वर को सबकी खबर है— "उसके घर देर है, अंधेर नहीं।" 

चंपत राय जी की अटूट निष्ठा पर 'विघ्न-संतोषियों' द्वारा शंका के बीज बोने का यह कुप्रयास अत्यंत निंदनीय है। जो लोग आज अफवाहें फैला रहे हैं, वे सब जानते हैं कि जब वे स्वयं कभी राम जी के काज के सगे नहीं हो सके, तो उनके सच्चे सेवकों के प्रति सहानुभूति कैसे रख सकते हैं?

चंपत राय जी ने इस्तीफा देकर यह साबित कर दिया है कि वे इस अग्निपरीक्षा से भी 'खरा सोना' बनकर ही निकलेंगे।

यह स्पष्ट दिखाई देता है कि राम मंदिर के भव्य निर्माण से भारतवासियों में जो सांस्कृतिक गौरव जागा है, उससे विपक्षी पाले में खलबली है। इसीलिए वैश्विक स्तर पर राम मंदिर की पावन छवि को धूमिल करने के लिए यह एक सुनियोजित षड्यंत्र प्रतीत होता है।

सनातनी समाज को किसी भी तरह की अफवाह में आने के बजाय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की सरकार पर पूर्ण भरोसा रखना चाहिए। वे किसी की आस्था पर चोट नहीं पहुंचने देंगे। अपराधियों को उनके किए की सजा मिलकर रहेगी। अभी आठ आरोपी पकड़े गए हैं, आगे की पूछताछ में इस षड्यंत्र में शामिल अन्य चेहरे भी बेनकाब होंगे। दूध का दूध और पानी का पानी होकर रहेगा।

सपना सी.पी. साहू 'स्वप्निल'

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