विश्व साइकिल दिवस प्रत्येक वर्ष 3 जून को मनाया जाता है, ताकि साइकिल को एक सरल, सस्ती, विश्वसनीय और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन साधन के रूप में सम्मान दिया जा सके। यह स्वास्थ्य, फिटनेस, स्थिरता, अनुशासन और प्रकृति के साथ सामंजस्य का प्रतीक है। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2018 में इस दिवस को आधिकारिक मान्यता दी, ताकि विश्वभर में साइक्लिंग संस्कृति को बढ़ावा दिया जा सके और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सके।
आज हमारा देश ईंधन संकट, ग्लोबल वार्मिंग, ट्रैफिक जाम, पार्किंग की समस्या, वाहनों की अत्यधिक भीड़, बढ़ते प्रदूषण तथा जीवनशैली संबंधी रोगों जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में साइकिल केवल एक वाहन नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए एक व्यावहारिक और प्रभावशाली समाधान है।
साइकिल चलाना एक प्रकार का “गतिमान ध्यान” (Meditation in Motion) है। ब्रह्म मुहूर्त में ताजी सुबह की हवा में साइकिल चलाने से शारीरिक फिटनेस, मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और आध्यात्मिक स्थिरता प्राप्त होती है। नियमित साइक्लिंग शरीर और मन के लिए प्राकृतिक औषधि के समान कार्य करती है।
साइक्लिंग हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है, मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत करती है, फेफड़ों की क्षमता बढ़ाती है तथा शरीर की प्रतिक्रियात्मक क्षमता को तेज करती है। यह हृदय-फेफड़ा (Cardiopulmonary) और मस्कुलोस्केलेटल (Musculoskeletal) प्रणाली के लिए सबसे श्रेष्ठ व्यायामों में से एक है। नियमित साइक्लिंग स्वस्थ वजन बनाए रखने, सहनशक्ति और ऊर्जा बढ़ाने में भी सहायक होती है।
वैज्ञानिक अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ है कि नियमित शारीरिक गतिविधियाँ जैसे साइक्लिंग कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम कर सकती हैं, जिनमें मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, अवसाद, चिंता, अनिद्रा, हृदय रोग, स्ट्रोक और डीप वेन थ्रॉम्बोसिस शामिल हैं। साइक्लिंग रक्त संचार को बेहतर बनाती है तथा एंडोर्फिन, सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे “खुशी के हार्मोन” के स्तर को बढ़ाती है, जो सकारात्मकता और मानसिक प्रसन्नता के लिए जिम्मेदार होते हैं।
साइक्लिंग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके लिए किसी खेल मैदान, महंगे उपकरण या साथी की आवश्यकता नहीं होती। आपकी साइकिल ही आपकी सच्ची साथी बन जाती है। शायद यह एकमात्र ऐसा खेल है जिसका आनंद हर मौसम — गर्मी, सर्दी और बारिश — में लिया जा सकता है। वास्तव में, सर्दियों की सुबहें और बारिश का मौसम सबसे यादगार और शांतिपूर्ण लंबी राइड्स का अनुभव प्रदान करते हैं।
व्यक्तिगत स्वास्थ्य लाभों के अलावा साइक्लिंग समाज के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। सड़क पर चलने वाली प्रत्येक साइकिल का अर्थ है — कम प्रदूषण, कम ईंधन खपत, कम ट्रैफिक जाम और अधिक स्वस्थ पर्यावरण। साइक्लिंग संस्कृति को बढ़ावा देकर हम आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरित और स्वस्थ शहरों का निर्माण कर सकते हैं।
इस विश्व साइकिल दिवस पर आइए हम संकल्प लें कि साइक्लिंग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएंगे। साइकिल केवल दो पहियों वाली मशीन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, सादगी, स्वतंत्रता, अनुशासन और सतत जीवनशैली का प्रतीक है।
दो पहिए, एक मिशन, एक स्वस्थ राष्ट्र :
साइक्लिंग के माध्यम से राष्ट्रीय स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चला रहे हैं प्रो. (डॉ.) अनिल नौसरान
जब अधिकांश लोग बढ़ती उम्र में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के कारण अपनी गति धीमी कर देते हैं, तब साइक्लोमेड फिट इंडिया के संस्थापक प्रो. (डॉ.) अनिल नौसरान ने एक अलग राह चुनी — स्वास्थ्य, अनुशासन और सामाजिक जागरूकता की राह, साइक्लिंग के माध्यम से।
करीब 30 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, वर्ष 2018 में डॉ. नौसरान ने पुनः साइक्लिंग शुरू की। इससे पहले वे वर्ष 1988 में नियमित रूप से साइकिल चलाते थे। उनका कहना है कि जब उन्हें महसूस हुआ कि आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न रोग धीरे-धीरे उनके स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं, तब उन्होंने पुनः साइक्लिंग को अपनाने का निर्णय लिया।
तब से साइक्लिंग केवल उनकी व्यक्तिगत फिटनेस का माध्यम नहीं रही, बल्कि यह एक राष्ट्रीय जनस्वास्थ्य मिशन बन गई।
नियमित साइकिल यात्राओं एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य जागरूकता साइकिल यात्राओं के माध्यम से डॉ. नौसरान “मेडिकल कुंडली” अर्थात विवाह पूर्व स्वास्थ्य परीक्षण के प्रति जागरूकता फैला रहे हैं। जिसका उद्देश्य थैलेसीमिया जैसे आनुवंशिक रोगों तथा एचआईवी जैसी गंभीर एवं असाध्य बीमारियों की रोकथाम करना है।
वर्षों के दौरान उन्होंने कोलकाता, मुंबई, शिमला, मसूरी, नैनीताल, लैंसडाउन, पौड़ी, श्रीनगर, प्रयागराज, जयपुर, बिहार, करनाल, सोनीपत, अयोध्या, ब्रज भूमि, चंडीगढ़, गुरुग्राम सहित देश के अनेक शहरों और क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता साइकिल यात्राएँ की हैं।
उनकी सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक नवंबर 2022 की वह ऐतिहासिक साइकिल यात्रा रही, जब उन्होंने अपने सपनों की “कश्मीर से कन्याकुमारी” साइकिल यात्रा केवल 21 दिनों में पूर्ण की। इस यात्रा में उन्होंने लगभग 3775 किलोमीटर की दूरी तय की।
अब डॉ. नौसरान का अगला लक्ष्य अरुणाचल प्रदेश के तवांग से गुजरात के द्वारका तक राष्ट्रीय स्वास्थ्य जागरूकता साइकिल यात्रा पूर्ण करना है, जिसे वे 22 जनवरी 2029 को 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने से पहले पूरा करना चाहते हैं।
उनका दूसरा ड्रीम प्रोजेक्ट मुंबई से कोलकाता तक समुद्री तटों के साथ साइकिल यात्रा करना है, जिसमें गोवा, कन्याकुमारी, रामेश्वरम और पुरी जैसे प्रमुख स्थान शामिल होंगे। इस यात्रा की कुल दूरी लगभग 4400 किलोमीटर होगी।
वर्ष 2022 में उन्होंने “साइक्लोमेड फिट इंडिया” नामक राष्ट्रीय साइक्लिंग समूह की स्थापना की। आज इस समूह से देशभर के लगभग 1000 सक्रिय साइक्लिस्ट जुड़े हुए हैं। इनमें मेरठ के लगभग 40 सदस्य हैं, जिनमें से 10 से 15 सदस्य नियमित रूप से साइक्लिंग करते हैं।
इस समूह की विशेष बात यह है कि इसमें पुरुषों और महिलाओं दोनों की सक्रिय भागीदारी है। समूह में 71 वर्ष आयु के एक पुरुष एवं एक महिला साइक्लिस्ट भी शामिल हैं, जो आज भी नियमित रूप से साइक्लिंग कर रहे हैं।
इसी स्वास्थ्य और जागरूकता की भावना को आगे बढ़ाते हुए, साइक्लोमेड फिट इंडिया द्वारा 3 जून को 50 किलोमीटर की एडवेंचर राइड का आयोजन किया जा रहा है। इस राइड में महिला एवं पुरुष दोनों साइक्लिस्ट भाग लेंगे। यात्रा प्रातः 4:00 बजे मेरठ–पौड़ी हाईवे से प्रारंभ होगी।
डॉ. नौसरान के अनुसार, वर्तमान समय में मेरठ कैंट क्षेत्र एवं मेरठ–पौड़ी हाईवे साइक्लिंग के लिए सबसे सुरक्षित मार्गों में से एक हैं।
जनसामान्य के लिए उनका संदेश सरल लेकिन प्रेरणादायक है —
“साइकिल उठाइए और पैडल चलाना शुरू कीजिए।
दो पहिए — शुद्ध आनंद।”
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