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Saturday, May 30, 2026

चलो रहनुमा बनकर फिर मिलेंगे दुआ बनकर... रविंद्र तंवर "सूर्योदय"


नित्य संदेश

चलो रहनुमा बनकर फिर मिलेंगे दुआ बनकर


मोहब्बत पाने की चाहत में,

उसकी दोस्ती को खो दिया।

हां देखते ही देखते मैं,

उसके लिए अजनबी हो गया।।


उसे यकीं ही न हो सका,

कभी चाहत पर मेरी।

मैं गिरता गया उसकी नजरों में,

और वो मेरे लिए खुदा हो गया।।


उसकी चाहत मेरे दिल में,

यू ही ताउम्र रहेगी।

जो है मोहब्बत उससे,

वो न किसी और से होगी।।


चलो अब अपनी कहानी को,

मैं विराम देता हूं।

अजनबी होते एक हसीं रिश्ते को,

फिर दोस्ती का नाम देता हूं।।


फिर हसी मजाक और दिल की बात,

एक दुसरे के साथ शेयर किया करेंगे।

जब भी होंगे अकेले इस जहां में,

एक दूजे का साथ दिया करेंगे।।


जो मैं रो दू कभी तो आसू पोंछ देना तुम,

यू हो कर अजनबी न मुझे खोना तुम।

तुम्हारे होने से मुक्कमल मेरी दास्ता होती है,

इश्क़ हो या दोस्ती मेरी राहें तुम पर खत्म होती है।।



रविंद्र तंवर "सूर्योदय"

बड़वाह (म. प्र.)

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