नित्य संदेश ब्यूरो, असम। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सुबह असम के डिब्रूगढ़ पहुंचकर चाय बागान के बीच राज्य की नारी शक्ति के साथ एक यादगार सुबह बिताई। प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल एक औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि असम की संस्कृति और अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली चाय बागान की श्रमिक महिलाओं के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक बड़ा अवसर भी बना। चाय की हरी पत्तियों के बीच प्रधानमंत्री ने इन महिलाओं से उनके जीवन के संघर्षों, अनुभवों और उनकी दैनिक दिनचर्या पर विस्तार से चर्चा की।
"आप मेरी गुरु हैं" - प्रधानमंत्री का भावुक संवाद
मुलाकात के दौरान एक भावुक पल तब आया जब प्रधानमंत्री ने चाय की पत्तियां चुनने वाली महिलाओं के कौशल और उनकी मेहनत को नमन किया। उन्होंने वहां मौजूद महिलाओं से कहा, "आप सब जिस कुशलता और लगन से काम कर रही हैं, वह वाकई प्रेरणादायक है। आज आप मुझे अपना काम करना सिखा रही हैं, इसलिए आप मेरी गुरु हैं।" प्रधानमंत्री के इन शब्दों ने वहां मौजूद महिलाओं का उत्साह बढ़ा दिया। पीएम ने उनके हाथ से चाय की पत्तियां तोड़ने की तकनीक को भी समझा और उनके कार्य के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की।बच्चों की शिक्षा पर विशेष संवाद
सिर्फ काम ही नहीं, प्रधानमंत्री ने महिलाओं से उनके घर-परिवार और बच्चों के भविष्य को लेकर भी बात की। उन्होंने विशेष रूप से पूछा कि उनके बच्चे स्कूल जा रहे हैं या नहीं और उनकी शिक्षा में किस तरह की चुनौतियां आ रही हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि "आत्मनिर्भर असम" का सपना तभी साकार होगा जब चाय बागानों में काम करने वाले इन परिवारों की अगली पीढ़ी शिक्षित और सशक्त होगी। उन्होंने सरकार की ओर से शिक्षा के लिए चलाई जा रही योजनाओं के बारे में भी जानकारी ली।सेल्फी और सोशल मीडिया पर चर्चा
मुलाकात के अंत में, श्रमिक महिलाओं के आग्रह को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने उनके साथ बेहद आत्मीयता से सेल्फी खिंचवाई। प्रधानमंत्री का यह सहज अंदाज देख महिलाएं उत्साहित नजर आईं। इन खास पलों को प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (Twitter) पर साझा करते हुए असम की इन महिलाओं के जज्बे को सलाम किया।यह दौरा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि केंद्र सरकार न केवल असम के बुनियादी ढांचे, बल्कि वहां की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण को देश की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। चाय की इन कलीनुमा पत्तियों के बीच खिंची गई तस्वीरें आज एक बदलते और आत्मनिर्भर होते असम की नई पहचान बन गई हैं।





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