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Saturday, April 4, 2026

“उठो, जागो और आगे बढ़ो” का संदेश: सुभारती में स्वामी विवेकानंद पर प्रेरक व्याख्यान



नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठः स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद शोध पीठ द्वारा लिबरल आर्ट्स एंड ह्यूमैनिटीज विभाग, फैकल्टी ऑफ आर्ट्स एंड सोशल साइंस के संयुक्त तत्वावधान में “स्वामी विवेकानंद जी की शिक्षाएं एवं वर्तमान जीवन में प्रासंगिकता” विषय पर एक प्रेरणादायक व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं युवा पीढ़ी को स्वामी विवेकानंद के महान विचारों, आदर्शों एवं जीवन मूल्यों से परिचित कराते हुए उन्हें आधुनिक जीवन में आत्मसात करने के लिए प्रेरित करना रहा।


कार्यक्रम का शुभारंभ अत्यंत गरिमामय वातावरण में स्वामी विवेकानंद जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस पावन अवसर ने पूरे सभागार को आध्यात्मिक ऊर्जा, सकारात्मकता और प्रेरणा से ओतप्रोत कर दिया। उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों ने श्रद्धा के साथ स्वामी जी को नमन किया। कार्यक्रम के दौरान स्वामी विवेकानंद जी के विचारों और उनके जीवन दर्शन पर गहन चर्चा की गई। वक्ताओं ने मानव सेवा, आत्मनिर्भरता, नैतिकता, आध्यात्मिकता एवं युवा जागरण जैसे उनके मूल सिद्धांतों को विस्तार से रेखांकित किया और बताया कि ये विचार आज के जटिल और प्रतिस्पर्धात्मक युग में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे।



कार्यक्रम की शुरुआत में स्वागत उद्बोधन प्रो. (डॉ.) मोनिका मेहरोत्रा, प्रोफेसर एवं संयोजिका, स्वामी विवेकानंद शोध पीठ द्वारा दिया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास में अत्यंत सहायक होते हैं तथा उन्हें नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक बनाते हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध संदेश — “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको” — का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को निरंतर प्रयास, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के साथ अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर रहने की प्रेरणा दी।


मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट वक्ता के रूप में प्रो. (डॉ.) अनीशा श्रीवास्तव, अध्यक्ष, इतिहास विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने अपने प्रभावशाली एवं सारगर्भित वक्तव्य में स्वामी विवेकानंद के विचारों की गहराई को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हुए कहा कि आज का युवा यदि आत्मबल, अनुशासन और राष्ट्र सेवा की भावना को अपनाए, तो वह न केवल अपने जीवन को सफल बना सकता है, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को लक्ष्य के प्रति समर्पण, मानसिक दृढ़ता और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया।


कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि वर्तमान समय में जब युवा वर्ग अनेक चुनौतियों, तनाव और भ्रम की स्थिति से गुजर रहा है, तब स्वामी विवेकानंद के विचार उन्हें सही दिशा प्रदान करते हैं। उनके सिद्धांत आत्मचिंतन, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक संवेदनशीलता और राष्ट्र निर्माण की भावना को सशक्त करते हैं। यह व्याख्यान श्रृंखला न केवल ज्ञानवर्धक रही, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर आत्मविश्वास, नैतिकता और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में भी अत्यंत प्रभावशाली सिद्ध हुई। कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ, जहां सभी प्रतिभागियों ने इसे एक प्रेरणादायक और सार्थक पहल बताया।

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