-कई जगहों पर अधिकारियों की “मेहरबानी” आ रही साफ नजर,
तनाव बरकरार
तरुण आहुजा
नित्य संदेश, मेरठ। आवास विकास परिषद की हालिया कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद क्षेत्र में चल रहे जिम, रेस्टोरेंट, हॉस्पिटल यहां तक कि परचून की दुकान और स्कूलों को अवैध बताकर उन पर कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर कई बन रहे निर्माण ऐसे हैं जिन पर महीनों से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सर्वे किसने किया, यही के
बाबू और जई ने, अगर सर्वे किया गया और अवैध निर्माण चिन्हित हुए, तो फिर कुछ पर ही
सख्ती क्यों? कई जगहों पर अधिकारियों की “मेहरबानी” आज भी साफ नजर आ रही है। सेक्टर-1
से 6 तक पिछले कई सालों से बाबू चमन, जो नोटिस चस्पा और सील की कार्यवाही में सबसे
आगे दिखते है, उन्होंने चार महीनों से तैनात जेई रामकिशन गुप्ता और एई को अवैध निर्माण
क्यों नहीं बताए? अधिकारियों पर आरोप है कि वे कार्रवाई की बजाय सिर्फ खानापूर्ति कर
रहे हैं। जब भी किसी निर्माण की जानकारी मांगी जाती है, तो जवाब मिलता है कि यह पूर्व
जेई अजब सिंह और एई सौरभ के समय का मामला है। हमें जानकारी नहीं।
239/1 और 439/3 जैसी कुछ जगह बने उदाहरण
इन संपत्ति को लेकर स्थिति और भी उलझी हुई है। जई रामकिशन
के अनुसार, 26 नवंबर 2025 को 239/1 के आवंटी सचिन ने शमन शुल्क के लिए आवेदन किया था,
तो 11 दिसंबर 2025 को उसे कारण बताओ नोटिस जारी क्यों हुआ और 11 तारीख का नोटिस चार
दिन बाद 15 दिसंबर की तारीख को कैसे चस्पा किया गया? अब सवाल यह उठता है कि जब आवेदन
हो चुका था तो नोटिस क्यों दिया गया? और नोटिस देकर लाल निशान लगा दिया गया तो फिर
कार्रवाई क्यों नहीं की गई? चार महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह स्पष्ट नहीं
हो पाया है कि शमन शुल्क जमा हुआ या नहीं। वहीं, एक्सियन अभिषेक राज द्वारा लगाए गए
लाल निशान को भी दो महीने से अधिक हो चुके हैं, लेकिन कोई ध्वस्तीकरण या सीलिंग नहीं
की गई।
अन्य कई निर्माण भी सवालों में
शास्त्री नगर और आस-पास के क्षेत्रों में कई अन्य स्थान
533/6, 651/6 रंगोली रोड, 9/10 शास्त्री नगर, 140/9 फैसल मस्जिद के पास 317/5/11 सेक्टर
11 शास्त्री नगर और 439/3 भी अवैध निर्माण के दायरे में बताए जा रहे हैं। खासतौर पर
439/3 पर जुलाई 2025 में अनाधिकृत निर्माण गिराने के आदेश के बावजूद आज तक कार्रवाई
नहीं हुई।
पत्रकार को धमकी का आरोप
इन मामलों को उजागर करने वाले पत्रकार को कथित तौर पर
खबर रोकने का प्रलोभन दिया गया। जब उन्होंने मना किया, तो उनके घर पर बुलडोजर चलाने
की धमकी तक दी गई। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा बन रहे अवैध निर्माणों पर
अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
बड़ा सवाल
अगर अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, तो फिर
यह चयनात्मक रवैया क्यों? क्या कुछ निर्माणों को संरक्षण दिया जा रहा है? यह मामला
अब पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सील लगे स्कूल, हॉस्पिटल
को भी मिले राहत, या बाकियों पर भी कार्यवाही। डी आर एस, अमेरिकन किड्स, स्कूल और सैनफोर्ड
हॉस्पिटल पर सील लगने के बाद जनचर्चाएं है कि आज भी कुछ आवासीय जगह स्कूल, हॉस्पिटल,
रेस्टोरेंट, हाइड आउट कैफे चल रहे है, इन पर कार्यवाही हो या सील लगी जगह को भी खोला
जाए।

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