मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग में “ग्रोथ, इक्विटी एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट: 21वीं सदी में चुनौतियाँ एवं अवसर” विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन सत्र संपन्न हुआ। सत्र का शुभारंभ विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रविन्द्र कुमार शर्मा के स्वागत भाषण से हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर एल. लाडू सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि ग्रोथ, समानता और स्थिरता से संबंधित प्रस्तुत शोध-पत्र आज के मध्य-पूर्व संकट के संदर्भ में और भी प्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने कहा कि सस्टेनेबिलिटी के अभाव में मानव जीवन के मूल्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा तथा यदि उत्पादन का न्यायसंगत वितरण नहीं किया गया, तो यह मानवता के विवेक को आहत करेगा।
इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) के निदेशक प्रोफेसर शिव कुमार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग से उत्पादन में वृद्धि तो होगी, किंतु इससे आय और संसाधनों के वितरण में असमानता और अधिक बढ़ सकती है।
विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर एस. पी. सिंह ने ऊर्जा क्षेत्र में विशेष निधि के माध्यम से भारत में सस्टेनेबिलिटी को प्रोत्साहित करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने वैश्विक संघर्षों और जनसंख्या दबाव के संदर्भ में खाद्य सुरक्षा एवं स्थिरता से जुड़ी चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि विकास और वितरण के असंतुलन, जलवायु परिवर्तन तथा अप्रत्याशित आपदाओं के जोखिमों का प्रभावी प्रबंधन हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्रोफेसर संजीव कुमार ने सेमिनार की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। कार्यक्रम में प्रोफेसर दिनेश कुमार, लोकेश कुमार, मंजू रानी, शालनी चौधरी, कृपेश त्यागी, सपना जैन, चिम्मई चतुर्वेदी सहित अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे। समापन सत्र धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्र गान के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
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